निर्भीक, निर्मोही, निराले: श्री चन्द्रहास गुरुजी

” तन समर्पित – मन समर्पित और यह जीवन समर्पित,चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं “इस विचारधारा को जीते हुए विपरीत परिस्थितियों के बीच अपने संकल्प…