गोंडी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

नई दिल्ली।

पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा है कि देश में 1.30 करोड़ लोग गोंडी भाषा बोलने वाले हैं। उन्होंने इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग केन्द्र सरकार से की है। श्री सिंह ने 24 मार्च 2026 को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया।

उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि देश में 1.30 करोड़ लोग गोंडी भाषा बोलते हैं। इसके बावजूद इसके उपयोग को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।

संसद के उच्च सदन को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘गोंडी भाषा भारत की प्रमुख प्राचीन आदिवासी भाषाओं में से एक है, जिसे देश के अनेक राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लोग बोलते हैं। यह भाषा गोंड जनजाति की सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कथाओं और ज्ञान परंपरा की वाहक रही है।’

श्री सिंह के मुताबिक विभिन्न अध्ययनों के अनुसार देश में गोंडी भाषा बोलने वालों की संख्या करीब 1 करोड़ तीस लाख है। इस के बावजूद इसे संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। सिंह ने कहा कि इसी कारण गोंडी भाषा का संरक्षण और संवर्धन नहीं किया जा रहा। साथ ही शिक्षा और प्रशासन में भी इसके उपयोग को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।

श्री सिंह ने कहा कि आज जब देश अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध है, तब गोंडी भाषा को संवैधानिक मान्यता देना अत्यंत आवश्यक है। सिंह ने कहा कि इससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ उनके आत्मसम्मान और पहचान को सुदृढ़ किया जा सकेगा।

उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि गोंडी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए जाएं, ताकि देश की इस महत्वपूर्ण आदिवासी भाषा को उचित सम्मान और संरक्षण मिल सके।

इस दौरान सदन में आदिवासी कार्य मंत्री जुएल ओरांव भी मौजूद थे। श्री सिंह ने उनसे कहा कि आप भी प्रधानमंत्री श्री मोदी से गोंडी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश कीजिए।

– अमिताभ पाण्डेय

Editor

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