छतरपुर का ऐतिहासिक किशोर सागर तालाब अतिक्रमण के कारण सिमटता जा रहा है। इस मामले में प्रशासन के स्वार्थी तत्व गुमराह कर रहे हैं तो कब्जेधारी झूठ परोसकर भ्रम फैला रहे है।
इस संबंध में एनजीटी के स्पष्ट आदेश है कि तालाब के मूल रकबा, एफटीएल भराव क्षेत्र और 10 मीटर के ग्रीन जोन से कब्जे हटाये जाये।
एनजीटी के बाद द्वितीय सत्र न्यायाधीश के आदेश बाद भी छतरपुर का प्रशासन कब्जेधारियों को बचा रहा है। अदालत की अवमानना होने पर पार्थ जायसवाल कलेक्टर छतरपुर, माधुरी शर्मा सीएमओ नगरपालिका छतरपुर, एसडीएम सहित अन्य जिम्मेदारों पर भी अवमानना कार्यवाही के लिये अदालत में मामला विचाराधीन है।
इस पूरे में रोचक तथ्य यह है कि जो शहनाई गार्डन के संचालक स्वयं को दूध का धुला बता रहे है वह शहनाई गार्डन को तालाब की सीमा में माना गया था।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार न्यायालय अनुविभागीय छतरपुर के प्रकरण क्रमांक 1195/ 3-2/ 99-2000 मप्र शासन बनाम रघुवीर शरण लाल के मामले में आदेश दिनांक 9-4-2003 को शहनाई गार्डन पर जुर्माना लगाया गया था।
इस मामले में रघुवीरशरण लाल ने किशोर सागर तालाब के खसरा क्रमांक 3117, 3116, 3113, 3114, 3115 कुल किता 5 रकवा 0.219 आरे भूमि रिहायशी प्रयोजन के उद्देश्य से बारात घर बनाने हेतु भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के अंतर्गत प्रस्तुत किया था।
इस मामले में अनुविभागीय न्यायालय ने ग्राम एवं नगर निवेश(टाउन एंड कंट्री) कार्यालय,लोक स्वास्थ्य यंत्रिकी, तहसीलदार, नगरपालिका छतरपुर से अभिमत माँगा।
सहायक संचालक ग्राम एवं नगर निवेश ने अपने मत में रघुवीर शरण निगम के सभी खसरा नंबर को किशोर सागर तालाब की सीमा में माना।
अनुविभागीय न्यायालय छतरपुर ने रघुवीर शरण निगम पर 17100 प्रीमियम और 200 रूपये अर्थदंड लगाया था।
इस आधार पर शहनाई गार्डन का निर्माण किशोर सागर तालाब सीमा में हुआ है इसके बाद भी शहनाई गार्डन में निर्माण कार्य चलते रहे. बाउंड्री बढ़ा दी गई और गार्डन के सामने के कच्चे स्थान को पक्का करा दिया गया।
चार दिन पहले भी शहनाई गार्डन के संचालक अजय लाल पर तालाब की भूमि पर पुराई कर कब्जा करने के आरोप लगे. तब छतरपुर विधायक ललिता यादव मौके पर पहुंची तो अजय लाल पर आरोप लगे कि उसने असलियत छुपाकर झूठ परोस दिया।
अब क्या विधायक असलियत सामने आने के बाद किशोर सागर तालाब पर शहनाई गार्डन जैसे सहित अन्य कोढ़ रूपी कब्जों को हटवा पाएंगी।
महत्वपूर्ण यह है कि पिछले साल बारिश में किशोर सागर तालाब ने प्रशासन को मुँह चिढ़ाते हुए अपनी सीमा खुद नाप दी थी। तालाब के भराव यानि एफटीएल (फुल टेंक लेबल) तक पानी ही पानी था, घर डूबे गये थे और लोगों ने पलायन कर दिया था। एनजीटी के आदेश में भी तालाब के मूल रकवा, एफटीएल और 10 मीटर के ग्रीन जोन क्षेत्र से कब्जे हटाने का आदेश है।
– धीरज चतुर्वेदी
( लेखक बुन्देलखण्ड क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार हैं
संपर्क : 9425145264 )





