धुन के पक्के, धर्म धुरंधर हैं चंद्रहास जी 

डॉ. मधूसुदन देशपांडे  

उन दिनों देश में राम जन्मभूमि आंदोलन चल रहा था। हर गांव शहर में मंदिर आंदोलन को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन लगातार चल रहा था । 

उस दौरान राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रम की जागरूकता के लिए प्रचार प्रचार संबंधी साहित्य का भोपाल में सृजन चंद्रहास जी ने किया।

मैं उन दिनों में विश्व हिंदू परिषद के भोपाल प्रांत अंतर्गत कार्य रहा था। मेरे साथ रामेश्वर शर्मा भी काम करते थे। 

उस समय हमने विश्व हिन्दू परिषद भोपाल के कार्यकर्ताओं की एक डायरेक्टरी बनाने का निर्णय लिया। यह कार्य आर्थिक सहयोग के साथ ही श्रम और समय भी चाहता था। इस बारे में जब चंद्रहास शुक्ल जी को बताया गया तो उन्होंने कुछ ही समय में लगभग डेढ़ हजार लोगों कार्यकर्ताओं की एक डायरेक्टरी तैयार कर दी। 

बाद में इसकी हजारों प्रतियां छापी गई जिनको उज्जैन के सिंहस्थ में निःशुल्क बंटवाया गया।

श्री शुक्ल ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जो क्रांतिकारी कविताएं लिखी वह इतनी चर्चित हुई की खुफिया एजेंसी के लोग खोजते रहे । वे जानना चाहते थे कि ये कविताएं कौन लिख रहा है?  

 श्री शुक्ल ने धर्म समाज की सेवा के लिए जो काम किया है वह प्रेरणादायक है ।

आज सनातन धर्म की जो गरिमा और प्रतिष्ठा बढ़ रही है उसमें चंद्रहास शुक्ला जैसे अनेक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान को हमें अवश्य ही याद रखना चाहिए। इनमें से ऐसे कई कार्यकर्ता हैं जो धर्म समाज के लिए अपने सर्वस्व का बलिदान कर नींव के पत्थर बन गए । श्री चन्द्रहास जी उनमें से एक हैं। जन्मदिन के शुभ अवसर पर हम उनका अभिनंदन करते हैं। 

( लेखक डॉ. मधूसुदन देशपांडे  विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े समाजसेवी और आयुर्वेद चिकित्सक हैं , संपर्क : 98270 49833 )

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