भोपाल।
देश में शासन व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो गई है। आम जनता को उनके हक-अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की जिम्मेदारी निभाने में सरकार नाकाम रही है। बढ़ती हिंसा, बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण कानून व्यवस्था की स्थिति निराशाजनक हो गई है। प्राकृतिक संसाधनों पर पूंजीपतियों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे में मध्यम वर्ग, निर्धन, कमजोर वर्ग के लिए जीवनयापन मुश्किल हो गया है। अन्याय, असमानता, अपराध बढ़ रहे हैं। देश में संवैधानिक मूल्यों का उल्लघंन हो रहा है। ऐसे वातावरण में ज़रुरत इस बात की है कि समाज के हर वर्ग के लोग एकजुट हों। हम सब मिलकर व्यवस्था परिवर्तन के लिए जन आंदोलन करें।
उक्त आशय के विचार आज भारत में राजनीतिक पुनर्जागरण हेतु आयोजित व्याख्यान में व्यक्त किए गए। इस अवसर पर मुख्य वक्ता भरत गांधी विश्वात्मा, भानुप्रताप सिंह एडवोकेट, ललित शर्मा, कपिल शर्मा, पूर्व अधिकारी अजय गंगवार, आजाद सिंह डबास, समाजसेवी ललित कुमार, के पी कूर्मवंशी, संजीव खैरवार, भास्कर गायकवाड़, अर्चना श्रीवास्तव, सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि अब राजनीति अवसरवादी हो गई है। समता , स्वतन्त्रता, बंधुत्व, न्याय, के आदर्शों को नुकसान हो रहा है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि प्रशासनिक, राजनीतिक क्षेत्र में बढ़ रहा भ्रष्टाचार समाज के लिए समस्याएं बढ़ा रहा है।
देशभक्ति की बात करने वाले नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ रहे हैं और भारत सरकार गरीब बच्चों की पढ़ाई कमजोर करने के लिए सरकारी स्कूलों को लगातार बंद कर रही है। सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
आज व्याख्यान के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान व्यवस्था में बदलाव के लिए नागरिकों को जागरूक होकर जन आंदोलन करना होगा तभी व्यवस्था में बदलाव हो सकेगा।

आज के कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। स्वागत भाषण इंजीनियर अजय सिंह किरार ने दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ सिध्दार्थ गुप्ता एडवोकेट ने किया।
इस अवसर पर शहर के विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
– अमिताभ पाण्डेय





