सामाजिक न्याय के लिए जरूरी अंबेडकर की राह

संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर का हम उनकी जयंती के मौके पर पुण्य स्मरण कर रहे हैं। उनका सपना था कि हर इंसान को समाजिक न्याय मिल सके।

हर गांव-शहर में लोगों के बीच बंधुता, समता और एकता हो। इससे समाज में शांति, साहस और विकास की भावना मजबूत होगी।

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर अंबेडकर की जयंती सिर्फ एक जयंती नहीं बल्कि बाबा साहब के विचारों को फ़ैलाने का अवसर है। हमें‌ अपनी अगली पीढ़ियों को बाबा साहेब के विचारों पर चलने के लिए तैयार करना होगा।

प्रसंगवश बताना होगा कि आज भी हमारे ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। यह अभाव दूर करने के लिए सबको शिक्षित और जागरूक बनना जरूरी है।

डॉ अंबेडकर की जयंती के मौके पर मध्य प्रदेश के गांव शहरों में भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस मौके पर डॉक्टर अंबेडकर के सामाजिक काम को, उनके विचारों को आगे बढ़ने का संकल्प लिया गया।

सागर जिले के सुरखी विधानसभा के गांव बंसिया में भी 14 अप्रैल को बड़े उत्साह के साथ डॉ भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई गयी। बंसिया गांव एक छोटा और मुख्य धारा से कटा गांव है। इस गांव में बड़े उत्साह से पहली बार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

14 अप्रैल के दिन अंबेडकर जयंती के अवसर पर बंसिया गांव की सड़कों पर नीले झंडे छा गए। बच्चों से लेकर‌ बुजुर्गों तक ने जयंती में बढ़कर-चढ़कर हिस्सा लिया। हाथों में नीला झंडा ऊपर उठाये बच्चे डीजे पर‌ जमकर नाचे।

जय भीम के नारो‌ से गांव का चप्पा-चप्पा गूंज उठा। लोगों के चेहरे पर खुशी और सिर पर नीला गुलाल चमक रहा था।

दूसरी ओर नीला रंग‌ लोगों के वस्त्रों पर सजा था। वहीं, बच्चियों के सिर पर सजा कलश जयंती की शोभा बढ़ा रहा था। गांव की टेढ़ी-मेढ़ी और छोटी-छोटी गलियों से शोभायात्रा सरपंच के घर पर‌ पहुंची।

इस दौरान‌ सरपंच बुंदेल सिंह के बड़े भाई विक्रम सिंह ने शोभायात्रा का स्वागत करते हुए कन्याओं को न्योछावर भेंट की।

बंसिया गांव की ऐतिहासिक अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में गांव के बुजुर्ग, लल्लूभाई इंजीनियर, शोभाराम विद्यार्थी योगेश अहिरवार, समाज सेवा के कार्य करने वाले नरेश अहिरवार, युवा विजय अहिरवार सहित महिलाएं और बच्चे भी उपस्थित रहे।

सभी का यह मानना था कि हम डाक्टर अंबेडकर के विचारों को न सिर्फ समझे बल्कि उनके विचारों से अपने जीवन को फलीभूत करें। यह जयंती इस बात का भी प्रमाण है कि, अब ग्रामीण परिवेश में शिक्षा और हक अधिकार के लिए जागरूकता बढ़ रही है।

– सतीश भारतीय

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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