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आजीविका मिशन के भ्रष्ट अफसरों को कौन बचा रहा है ?

Editor August 23, 2026

भोपाल।

मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों को बचाया जा रहा है। इस मामले में राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान संस्थान ई ओ डब्लू द्वारा प्रकरण दर्ज कर लिए जाने के बाद भी प्रभावी कार्यवाही नहीं की जा रही है।

आजीविका मिशन के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी और पीसीसीएफ रेंक के आईएफएस ललित मोहन बेलबाल एवं अन्य अधिकारियो पर FIR के उपरांत 2 वर्ष बाद भी चालान पेश क्यों नहीं किया जा रहा है। आखिर ई ओ डब्लू इस मामले में तेजी से कार्यवाही कब करेगा ?

यह सवाल सोशल एक्टिविस्ट भूपेंद्र प्रजापति ने उठाए हैं जिन्होंने आजीविका मिशन के भ्रष्टाचार को सप्रमाण उजागर किया है। श्री प्रजापति ने राज्य आर्थिक अनुसंधान संस्थान ई ओ डब्लू को संपूर्ण दस्तावेज के साथ शिकायत की थी। इसके आधार पर ई ओ डब्लू ने आधार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बेलबाल और कई अन्य कर्मचारियों पर एफ आई आर दर्ज की थी।

इस मामले में लगभग 2 साल बीत जाने के बाद भी चालान पेश नहीं किया गया। इस संबंध में सोशल एक्टिविस्ट भूपेंद्र प्रजापति ने 21 अगस्त 2026 को राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान संस्थान ई ओ डब्लू के भोपाल मुख्यालय में महानिदेशक से मुलाकात की।

श्री प्रजापति ने आजीविका मिशन के दोषी अधिकारियों पर FIR उपरांत 2 वर्ष बाद भी चालान पेश नहीं होने के सम्बन्ध में महानिदेशक से चर्चा कर पत्र दिया। इस पत्र में कहा गया है कि ई ओ डब्लू द्वारा दिनांक 01/04/2025 को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के 3 अधिकारियों के पर जाँच उपरांत FIR की कार्यवाही की गई लेकिन एक अन्य दोषी कर्मचारी के दोषी साबित होने के बावजूद नामजद FIR नहीं की गई है ।

इस संबंध में विधानसभा सत्र जून 2024 में विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा किये गए प्रश्न के उत्तर में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 4 अधिकारियों-कर्मचारियों को दोषी माना था ।

इनमें आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल, अतिरिक्त सीईओ विकास अवस्थी राज्य परियोजना प्रबंधक सुषमा रानी शुक्ला और एक कर्मचारी संतोष कुरुप शामिल है। ई ओ डब्लू ने दोषी अधिकारियों में से एक कर्मचारी संतोष कुरुप के ऊपर नामजद FIR नहीं की तथा FIR में चौथे नाम के सम्बन्ध में “आजीविका मिशन भोपाल के अधिकारी व अन्य सम्बंधित” पर FIR का उल्लेख कर कर्मचारी को बचाने का प्रयास किया।

इस मामले में दोषी कर्मचारी संतोष कुरुप है जिस पर ई ओ डब्लू की FIR में अस्पष्टता के कारण पर विभाग अब तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाया । दोषी कर्मचारी संतोष कुरूप अब भी विभाग में कार्य कर रहा है जबकि राज्य परियोजना प्रबंधक सुषमा रानी शुक्ला को FIR उपरांत विभाग द्वारा नौकरी से हटा दिया गया था ।

श्री प्रजापति ने बताया कि वर्तमान में आजीविका मिशन में लगातार कई जिलो में करोडो रुपय के भ्रष्टाचार की शिकायते लगातार आ रही है। गरीब महिलाओं के स्व सहायता समूह, संगठन से कुछ ही महीनो में लगातार करोडो रुपय निकाले जाने की खबरे आ रही हैं ।

इसमें गुना जिले में 3 करोड़, दतिया जिले के समस्त CLF में करोडों का भ्रष्टाचार, खाते सीज, सागर जिले में 7 करोड़ का भ्रष्टाचार , रायसेन 1 करोड़ , दमोह जिले में 2 करोड़ का भ्रष्टाचार शामिल है। यह भ्रष्टाचार इसलिए बढ़ रहे है क्योंकि भ्रष्ट अधिकारियों , कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही नहीं हो रही है ।

ई ओ डब्लू द्वारा 2 वर्ष पूर्व जिन भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों पर FIR की गई थी उनका आज तक चालान पेश नहीं हुआ । ना कोई ठोस कार्यवाही की गई जिसके कारण आजीविका मिशन में भ्रष्ट अधिकारियों कर्मचारियों के मन से कानून का डर खत्म हो गया है।

श्री प्रजापति ने बताया कि आजीविका मिशन के भ्रष्टाचार के कारण पोषण आहार संयंत्र बंद हुए, शासकीय विधायलयो में गणवेश कार्य बंद किया गया , आंगनवाड़ी में गुड़चिक्की सप्लाई बंद की गई ।

इसके कारण अनेक गांवों की लाखों गरीब महिलाएं बेरोजगार हो गई है। शासन द्वारा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में भारी भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही नहीं करना आश्चर्यजनक है।

सवाल यह है कि भ्रष्ट अधिकारियों, कर्मचारियों को क्यों बचाया जा रहा है? जिनके भ्रष्ट आचरण साबित हो गए उनके विरुद्ध शासन की ओर से सख्त कार्यवाही कब होगी ?