भ्रामक खबरों पर अंकुश लगाने के लिए कार्यवाही जारी

नई दिल्ली।

सरकार ने भ्रामक प्रचार, समाचार पर अंकुश लगाने के लिए बहुस्तरीय तंत्र लागू किया है।

सूचना की विश्वसनीयता में सुधार लाने के उद्देश्य से एफसीयू, आईटी नियम और मीडिया विनियम बनाए गए हैं। इस संबंध में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो के अंतर्गत एक फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) कार्यरत है।

एफसीयू केंद्र सरकार से संबंधित गलत सूचनाओं और भ्रामक खबरों की पहचान करती है। अधिकृत स्रोतों से समाचारों की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के बाद, एफसीयू सीमावर्ती जिलों सहित व्यापक प्रसार के लिए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सही जानकारी प्रकाशित करती है।

यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने 2 अप्रैल 2026 को दी। डा मुरुगन लोकसभा में उम्मेदा राम बेनीवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।

उल्लेखनीय है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के अंतर्गत सरकार भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में वेबसाइटों, सोशल मीडिया हैंडल और पोस्ट को ब्लॉक करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करती है।

इसके साथ ही सरकार विभिन्न मीडिया प्लेटफार्मों पर उपलब्ध वैधानिक और संस्थागत तंत्रों के माध्यम से भ्रामक खबरों पर अंकुश लगाने के लिए सभी संभव कदम उठाती है, जो इस प्रकार हैं :

प्रिंट मीडिया: समाचार पत्रों को भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) द्वारा जारी किए गए “पत्रकारिता आचरण के मानदंडों” का पालन करना अनिवार्य है। इन मानदंडों में अन्य बातों के अलावा, भ्रामक/मानहानिकारक/फर्जी समाचारों के प्रकाशन पर रोक लगाना शामिल है।

पीसीआई अधिनियम की धारा 14 के तहत, परिषद मानदंडों के कथित उल्लंघन की जांच करती है और मामले के अनुसार समाचार पत्र, संपादकों, पत्रकारों आदि को चेतावनी, फटकार या निंदा कर सकती है।

टेलीविजन: केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत टीवी चैनलों को कार्यक्रम संहिता का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें अन्य बातों के अलावा यह प्रावधान है कि अश्लील, मानहानिकारक, जानबूझकर झूठे और भ्रामक संकेत तथा अर्ध-सत्य वाली सामग्री का प्रसारण नहीं किया जा सकता है।

केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम 2021 में टीवी चैनलों द्वारा कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय प्रक्रिया का प्रावधान है। कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाती है।

डिजिटल मीडिया: डिजिटल मीडिया पर समाचार और समसामयिक मामलों के प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड सामग्री के प्रकाशकों के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (आईटी नियम, 2021) एक आचार संहिता के साथ-साथ ऐसे प्रकाशकों द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय संस्थागत तंत्र का प्रावधान करता है।

सामुदायिक रेडियो स्टेशन (सीआरएस) सीमावर्ती जिलों सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रामाणिक, सामयिक और स्थानीय प्रासंगिक जानकारी के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समय-समय पर निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत कार्यक्रम संहिता और विज्ञापन संहिता का पालन करने के लिए परामर्शी भी जारी करता है।

कार्यक्रम स्थानीय समुदाय के लिए तात्कालिक रूप से प्रासंगिक होने चाहिए, जिससे स्थानीय चिंताओं का समाधान हो सके और गलत सूचनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

सीआरएस को स्थानीय समुदाय के सदस्यों से मिलकर एक सलाहकार और विषय-सूची समिति गठित करनी होती है, जो सामुदायिक रेडियो पर प्रसारित होने वाली विषय-सूची का निर्धारण करती है।

लक्षित श्रोताओं तक बेहतर पहुंच और समझ सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रमों का प्रसारण स्थानीय भाषाओं और बोलियों में करना बेहतर होता है।सरकार भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए लगातार कार्यवाही कर रही है। – अमिताभ पाण्डेय

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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