पाकिस्तान से ड्रोन से भेजी 30 करोड़ की हेरोइन, सुरक्षा बल ने पकड़ी

( साहिल पठान )

बीकानेर ।

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राजस्थान के श्रीगंगानगर सेक्टर में सुरक्षा एजेंसियों ने कथित सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है।

रावला बॉर्डर के 14 KND क्षेत्र में BSF की G Branch से मिले महत्वपूर्ण खुफिया इनपुट के बाद चलाए गए बड़े सर्च ऑपरेशन में किसान के खेत से करीब 5 किलो 600 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम बरामद होने की जानकारी सामने आई है। बरामद नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 30 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह खेप पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए भारतीय क्षेत्र में पहुंचाई गई हो सकती है। पैकेटों के रस्सी से बंधे होने की जानकारी ने ड्रोन-डिलीवरी के शक को और मजबूत किया है।

हालांकि ड्रोन की सटीक उड़ान, सीमा पार से खेप गिराए जाने की परिस्थितियों और इस पूरे नेटवर्क की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इस बड़े ऑपरेशन में BSF की G Branch और 140 बटालियन BSF की भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है।

रावला बॉर्डर पर हुई इस कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी BSF की G Branch का खुफिया इनपुट है। सीमा सुरक्षा बल की यह इंटेलिजेंस विंग सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों, तस्करी नेटवर्क और संभावित सुरक्षा खतरों से संबंधित सूचनाओं को विकसित करने और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

14 KND क्षेत्र में संभावित नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर मिले इनपुट के बाद G Branch ने पुलिस और अन्य संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया। सूचना को गंभीरता से लेते हुए इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।

यही समय पर मिली सूचना आगे चलकर उस खेत तक सुरक्षा एजेंसियों को ले गई जहां संदिग्ध पैकेट बरामद हुए। यानी कथित तस्करी की योजना अगर ड्रोन के जरिए खेप गिराने से लेकर उसे भारतीय क्षेत्र में उठाकर आगे भेजने तक की थी, तो सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई ने इस पूरी प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया।

इस पूरे मामले में अब पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ भेजे जाने का एंगल जांच के केंद्र में है। भारत-पाकिस्तान सीमा के दूसरी तरफ से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की खेप भारतीय क्षेत्र में गिराए जाने की आशंका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।

रावला के 14 KND में खेत से बरामद पैकेट रस्सी से बंधे बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि क्या इन पैकेटों को किसी ड्रोन के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में गिराया गया था।

अगर जांच में यह एंगल पुष्ट होता है तो यह मामला एक संगठित ड्रोन-आधारित सीमा पार तस्करी नेटवर्क की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है। जांच एजेंसियां अब संभावित ड्रोन रूट, डिलीवरी का समय, खेप गिराए जाने की जगह और भारतीय क्षेत्र में इसे हासिल करने वाले संभावित हैंडलर्स की पहचान पर फोकस करेंगी।

सर्च ऑपरेशन के दौरान बरामद हुई नशीले पदार्थों की मात्रा ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक करीब 5 किलो 600 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम बरामद हुई है। इस खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में हेरोइन की बरामदगी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सिर्फ छोटी-मोटी तस्करी की खेप नहीं थी।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि इसे कहां पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कितने बड़े नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। बरामद पदार्थों को कब्जे में लेकर नियमानुसार आगे की जांच और परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

इस ऑपरेशन में 140 बटालियन BSF की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही। किसी भी खुफिया इनपुट को वास्तविक ऑपरेशन में बदलने के लिए जमीन पर तैनात सुरक्षा बलों की तेज प्रतिक्रिया आवश्यक होती है।

G Branch से मिले इनपुट के बाद संबंधित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय हुई और सर्च अभियान शुरू किया गया। 140 बटालियन BSF के स्तर पर जमीनी कार्रवाई और क्षेत्र की निगरानी ने ऑपरेशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसी तरह के ऑपरेशन में खुफिया इनपुट और फील्ड फोर्स के बीच समय पर तालमेल ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होता है। रावला की कार्रवाई इस तालमेल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई है।

14 KND क्षेत्र में किसान के खेत से मिले संदिग्ध पैकेटों ने सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत सतर्क कर दिया। जानकारी के अनुसार पैकेट रस्सी से बंधे हुए थे। इस तरह की पैकिंग ने जांच एजेंसियों के सामने ड्रोन के जरिए खेप गिराए जाने की आशंका को प्रमुख कर दिया। खेत और उसके आसपास के क्षेत्र की गहन तलाशी ली गई और संदिग्ध सामग्री को सुरक्षित कब्जे में लिया गया।

इसके बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन को और विस्तारित किया गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इसी तस्करी ऑपरेशन से जुड़ी कोई अन्य खेप या संदिग्ध सामग्री आसपास तो नहीं छिपाई गई है।

कांस्टेबल ओमप्रकाश का इनपुट महत्वपूर्ण: BSF के इंटेलिजेंस इनपुट के साथ स्थानीय पुलिस की भूमिका भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांस्टेबल ओमप्रकाश से मिले महत्वपूर्ण इनपुट के बाद थानाधिकारी बलवंत कुमार और उनकी टीम ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

पुलिस और BSF ने मिलकर संदिग्ध क्षेत्र की तलाशी ली। सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई का परिणाम यह रहा कि कथित तस्करी की खेप को भारतीय क्षेत्र में आगे बढ़ने से पहले ही बरामद कर लिया गया। अब पुलिस और अन्य एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इस खेप के पीछे कौन लोग सक्रिय थे और भारतीय क्षेत्र में इसे हासिल करने वाला संभावित नेटवर्क कौन सा था।

राजस्थान बॉर्डर पर BSF की ‘ईगल आई’ सक्रिय: रावला की कार्रवाई ने राजस्थान के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर BSF की लगातार निगरानी को एक बार फिर सामने ला दिया है। सीमा क्षेत्र में तैनात BSF सिर्फ जमीन पर होने वाली गतिविधियों पर नजर नहीं रखती, बल्कि खुफिया नेटवर्क के जरिए संदिग्ध गतिविधियों के पैटर्न को भी समझने की कोशिश करती है।

BSF G Branch की नजरें सीमा क्षेत्र में ईगल आई की तरह लगातार पैनी बनी हुई हैं। संभावित ड्रोन गतिविधि, तस्करी नेटवर्क और संदिग्ध मूवमेंट को लेकर विकसित होने वाली सूचनाएं सुरक्षा बलों को समय रहते कार्रवाई करने में मदद करती हैं।

रावला ऑपरेशन में भी यही इंटेलिजेंस-आधारित सुरक्षा मॉडल देखने को मिला। बॉर्डर पर तस्करी का तरीका बदला तो सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति भी बदली: आज सीमा पार तस्करी का स्वरूप पहले जैसा नहीं रह गया है।

पहले जहां तस्करों को इंसानों, वाहनों या अन्य भौतिक माध्यमों के जरिए सीमा पार करना पड़ता था, वहीं अब ड्रोन जैसी तकनीक ने अपराधी नेटवर्क को एक नया विकल्प दिया है। ड्रोन के जरिए कथित तौर पर नशीले पदार्थों की छोटी-बड़ी खेप भारतीय क्षेत्र में गिराई जा सकती है और सीमा पार मौजूद ऑपरेटर खुद सीमा पार किए बिना पूरी गतिविधि को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं।

ऐसे बदलते खतरे के बीच BSF की इंटेलिजेंस विंग का महत्व और बढ़ जाता है। रावला में हुई कार्रवाई बताती है कि सुरक्षा एजेंसियां अब केवल सीमा पर मौजूद व्यक्ति या वाहन को नहीं देख रही हैं, बल्कि संभावित ड्रोन नेटवर्क और उसके पीछे काम करने वाले स्थानीय हैंडलर्स तक अपनी निगाहें पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

एक खुफिया इनपुट से 30 करोड़ की खेप तक पहुंची सुरक्षा एजेंसियां: रावला ऑपरेशन को अगर घटनाक्रम के रूप में देखा जाए तो इसकी शुरुआत एक महत्वपूर्ण खुफिया इनपुट से हुई। BSF G Branch ने संभावित गतिविधि को लेकर संबंधित एजेंसियों को अलर्ट किया। इसके बाद पुलिस और BSF की टीमों ने क्षेत्र में सर्च अभियान शुरू किया।

14 KND में संदिग्ध खेत की तलाशी ली गई। वहां रस्सी से बंधे संदिग्ध पैकेट मिले। जांच के दौरान उनमें करीब 5 किलो 600 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम होने की जानकारी सामने आई। बरामद खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

इस तरह एक खुफिया इनपुट से शुरू हुआ ऑपरेशन करोड़ों रुपये की कथित ड्रग खेप की बरामदगी तक पहुंचा।

अब असली निशाना तस्करों का पूरा नेटवर्क: सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि खेप कहां मिली, बल्कि यह है कि खेप के पीछे कौन है। किस नेटवर्क ने कथित तौर पर इसे सीमा पार से भेजा? ड्रोन को कौन ऑपरेट कर रहा था? भारतीय क्षेत्र में इसे उठाने के लिए कौन आने वाला था? खेप को आगे कहां भेजा जाना था? क्या इसके पीछे पहले से सक्रिय कोई बड़ा ड्रग सिंडिकेट है? जांच एजेंसियां इन सभी सवालों के जवाब तलाशेंगी।

बरामद पैकेट, उनकी पैकिंग, स्थान, समय और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को जोड़कर कथित तस्करी नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश की जाएगी।

बरामदगी के बाद भी खत्म नहीं हुआ ऑपरेशन: खेप बरामद होने के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई खत्म नहीं हुई है। आसपास के इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। इसका उद्देश्य सिर्फ दूसरी खेप की तलाश करना नहीं, बल्कि संभावित हैंडलर्स के मूवमेंट और उनके रास्तों से जुड़े सुराग हासिल करना भी है।

सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि कहीं कोई अन्य पैकेट, उपकरण या संदिग्ध सामग्री क्षेत्र में छिपी न रह गई हो। साथ ही इस संभावना को भी ध्यान में रखा जा रहा है कि कथित तस्करी नेटवर्क ने खेप उठाने के लिए आसपास कोई सुरक्षित स्थान या रास्ता पहले से चिन्हित किया हो।

30 करोड़ की बरामदगी से कथित ड्रग नेटवर्क को बड़ा आर्थिक झटका: करीब 30 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत की नशीले पदार्थों की खेप की बरामदगी कथित तस्करी नेटवर्क के लिए बड़ा आर्थिक झटका है।

यदि यह खेप अपने संभावित गंतव्य तक पहुंच जाती तो इसे आगे किसी बड़े वितरण नेटवर्क का हिस्सा बनाया जा सकता था। लेकिन सीमा क्षेत्र में ही इसकी बरामदगी ने पूरी सप्लाई चेन को बाधित कर दिया। इससे जांच एजेंसियों को न केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी मिली है, बल्कि कथित नेटवर्क के खिलाफ आगे कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण सुराग भी मिल सकते हैं।

रावला की घटना के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा के इस सेक्टर में सतर्कता और बढ़ा दी गई है। फिलहाल BSF और पुलिस की सर्च कार्रवाई जारी है। सुरक्षा एजेंसियां आसपास के क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं और बरामद नशीले पदार्थों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

ड्रोन के जरिए कथित डिलीवरी, पाकिस्तान की तरफ से संभावित कनेक्शन, भारतीय क्षेत्र में मौजूद संभावित हैंडलर्स और आगे की सप्लाई चेन—इन सभी बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ रही है।रावला के 14 KND में हुई यह बड़ी कार्रवाई एक बार फिर बताती है कि राजस्थान के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर BSF की G Branch की खुफिया नजरें और 140 बटालियन की जमीनी ताकत मिलकर सीमा पार से होने वाली कथित तस्करी की कोशिशों के खिलाफ लगातार सक्रिय हैं।

करीब 5 किलो 600 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 30 करोड़ रुपये है, की बरामदगी ने कथित तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।

अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर सिर्फ बरामद खेप पर नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क पर है जो कथित तौर पर पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों को भारतीय क्षेत्र तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। जांच आगे बढ़ने के साथ इस ऑपरेशन से जुड़े और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

( वरिष्ठ पत्रकार साहिल पठान रक्षा संबंधी मामलों के विशेषज्ञ पत्रकार हैं , संपर्क 77288 63964 )

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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