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युवाओं को मिले रोजगार, बजट निराशाजनक

रतलाम। राज्य विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आज वित्तीय वर्ष 2026 27 के लिए बजट प्रस्तुत किया इस बजट को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों से मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है बजट पर अपने विचार प्रकट करते हुए युवाम संस्था के संचालक धर्मेंद्र मंडावरिया ने कहा है कि इस बजट में युवाओं का पलायन रोकने के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।

सामाजिक चिंतक और युवाओं को प्रतियोगिता परीक्षा के लिए तैयार करने वाली संस्था युवा ऑन के संचालक धर्मेंद्र का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में जो युवा मध्य प्रदेश में आईटी मेडिकल टेक्सटाइल सहित कुछ अन्य विषयों में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं उनके लिए मध्यप्रदेश में रोजगार क्यों नहीं है?

उन्हें रोजगार के लिए मुंबई दिल्ली सूरत पुणे बेंगलुरु हैदराबाद जैसे शहरों में क्यों जाना पड़ता है ?
मध्य प्रदेश के प्रतिभाशाली बच्चे सम्मानजनक रोजगार नहीं मिल पाने के कारण विदेश में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं कोई भी युवा अथवा उसका परिवारजन यह नहीं चाहता कि रोजगार के लिए उन्हें अपना घर बार शहर छोड़ना पड़े सवाल यह है कि जब अन्य प्रदेशों की सरकार अपने-अपने शहरों में बड़ी-बड़ी कंपनियां को लाकर स्थानीय युवाओं को उनमें रोजगार दे रही है तो आखिर मध्य प्रदेश के युवा इस युवा इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है ?
श्री धर्मेन्द्र ने कहा कि बजट कैसा भी हौ। दूरदर्शी – दूरगामी सोच का हौ, आर्थिक रूप से लचीला हौ लेकिन बजट से पहले मध्यप्रदेश सरकार नया कर्ज क्यों ले रही है।
बार बार कर्ज लेने से प्रदेश के नागरिकों पर कितना आर्थिक भार बढ़ रहा है?
सरकार की सोच भले ही दूरदर्शी हो लेकिन इस सोच के कारण प्रदेश निरंतर कर्ज के दलदल में डूबता जा रहा है ,
इस मामले में जनता, जनप्रतिनिधि, जागरूक नागरिक, पत्रकार, अर्थशास्त्री सभी की चुप्पी कुछ समझ नही आती है ? यह चुप्पी बहुत आश्चर्यचकित करने वाली है।
राज्य सरकार जो कर्ज लगातार ले रही है वह कर्ज हम सबकी आने वाली पीढ़ियों को ही चुकाना पड़ेगा।
ये कर्जा लेकर घी पीने की आदत को बदलना चाहिए अगली पीढ़ियों को बहुत परेशान करेगी।

— अमिताभ पाण्डेय

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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