समान नागरिक संहिता पर सहमति ज़रूरी, मतभेद नहीं: मोहन भागवत

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि समान नागरिक संहिता यूसीसी को बनाते समय सभी को विश्वास में लिया जाना चाहिए ताकि मतभेद पैदा न हों।

मोहन भागवत ने आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर आयोजित मुंबई में ‘संघ की 100 साल की यात्रा : नये क्षितिज’ कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि संघ का दृष्टिकोण हमेशा से सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का रहा है और किसी भी सुधार की दिशा में आगे बढ़ते समय इसी भावना को केंद्र में रखा जाना चाहिए।

मोहन भागवत ने कहा कि भारत का विभाजन इसलिए हुआ, क्योंकि “हिंदू भाव” को भुला दिया गया। मोहन भागवत ने कहा कि “धर्म के कारण ही देश का विभाजन हुआ। भारत में इस्लाम और ईसाई धर्म आज भी मौजूद हैं। कभी कभी झड़पें होती हैं, लेकिन फिर भी देश एकजुट रहा, लेकिन हिंदू भाव का विस्मरण भारत के विभाजन का मुख्य कारण बना।

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