Tuesday, 13 October 2026
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प्रधानमंत्री ने संविधान हत्या दिवस पर लोकतंत्र के रक्षकों को श्रद्धांजलि दी

Constitution Murder Day
Constitution Murder Day on 25th June

नई दिल्ली।

आपातकाल लागू होने के पचास साल पूरे होने के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज उन अनगिनत भारतीयों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जो देश के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक के दौरान लोकतंत्र की रक्षा में डटे रहे।

संवैधानिक मूल्यों पर हुए गंभीर हमले को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 जून संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाया जाता है – एक ऐसा दिन जब मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया था, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया था और अनगिनत राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया था।

श्री मोदी ने संविधान में निहित सिद्धांतों को मजबूत करने तथा विकसित भारत की कल्‍पना को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने कहा कि आपातकाल विरोधी आंदोलन एक सीखने वाला अनुभव था, जिसने हमारे लोकतांत्रिक ढांचे को संरक्षित रखने के महत्‍व की पुष्टि की।

श्री मोदी ने आपातकाल के काले दिनों को याद रखने वाले या उस दौरान जिन परिवारों ने कष्ट सहा, उन सभी लोगों का आह्वान किया कि वे अपने अनुभवों को सोशल मीडिया पर साझा करें, ताकि युवाओं में 1975 से 1977 तक के शर्मनाक समय के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके।

एक्स पर अनेक पोस्ट में श्री मोदी ने लिखा कि “आज भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक, आपातकाल लागू होने के पचास साल पूरे हो गए हैं। भारत के लोग इस दिन को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन, भारतीय संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म कर दिया गया और कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया। ऐसा लग रहा था जैसे उस समय सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को गिरफ़्त में ले लिया हो!

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर यह भी लिखा कि “कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल पाएगा कि किस तरह हमारे संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया, संसद की आवाज़ दबा दी गई और अदालतों को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। 42वां संशोधन उनके छल-कपट का एक प्रमुख उदाहरण है। गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और दलितों को खास तौर पर निशाना बनाया गया, जिसमें उनकी गरिमा का अपमान भी शामिल है।

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