– ( अमिताभ पाण्डेय )
भोपाल।
क्या जनहित से जुड़े किसी विषय में राज्यपाल की अधिसूचना जारी होने के पहले ही वसूली की कार्यवाही शुरू कुछ जा सकती है ? जिस नियम , निर्णय को राज्यपाल ने स्वीकृत नहीं किया हो उसे कैसे लागू किया जा सकता है ? ये सवाल पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने भोपाल बायपास पर हो रही टोल टैक्स की वसूली को लेकर उठाए हैं।
श्री सकलेचा ने आरोप लगाया है कि भोपाल बायपास सड़क मार्ग पर इंडियन टोल एक्ट,1851 की धारा 2 का दुरुपयोग कर जनता से, 360 करोड़ रुपये की वसूली की गई है ।
उन्होंने जनहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से लिए जाने वाले टोल टैक्स को बंद किए जाने की मांग की है।
भोपाल बायपास पर टोल वसूली को लेकर पूर्व विधायक श्री सकलेचा ने राज्य शासन पर गंभीर सवाल उठाए । उनका आरोप है कि शासन ने इंडियन टोल एक्ट, 1851 की धारा 2 का दुरुपयोग कर ऐसी सड़क पर जनता से लगभग 360 करोड़ रुपये वसूल लिए, जिसके निर्माण में शासन ने कोई राशि खर्च नहीं की ।
इस संबंध में दिनांक 15 अक्टूबर 2026 को जारी राज्यपाल की अधिसूचना क्रमांक 351 में 19 जुलाई 2026 से टोल वसूली की अनुमति दिए जाने को सकलेचा ने विधि-विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की मांग की है।
श्री सकलेचा के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना में 19 जुलाई 2026 से टोल वसूली का अधिकार दिया गया है। अर्थात अधिसूचना जारी होने से 88 दिन पहले की तारीख से वसूली को अनुमति दी गई।
उनका कहना है कि इंडियन टोल एक्ट, 1851 की किसी भी धारा में शासन को स्पष्ट वैधानिक अधिकार के बिना पूर्ववर्ती तारीख से पथकर वसूली लागू करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिसूचना 15 अक्टूबर को जारी हुई, तो उससे पहले की अवधि में टोल वसूली को किस वैधानिक आधार पर अधिकृत माना जा सकता है?
उनके अनुसार, इस विषय में सक्षम कानूनी प्रावधानों और न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप अधिसूचना की वैधता की जांच आवश्यक है।
वर्ष 2020 में भी दोहराई गई थी यही प्रक्रिया: श्री सकलेचा ने दावा किया कि 8 दिसंबर 2020 को जारी पूर्व अधिसूचना में भी 18 जुलाई 2020 से टोल वसूली की अनुमति दी गई थी, यानी अधिसूचना से लगभग 140 दिन पहले की तारीख से ।
उन्होंने कहा कि यह प्रश्न केवल वर्तमान अधिसूचना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व में अपनाई गई प्रक्रिया की वैधानिकता की भी जांच होनी चाहिए।निर्माण में शासन का योगदान शून्य तो फिर क्यों हुई टोल वसूली 360 करोड़ की टोल वसूली ?
श्री सकलेचा के मुताबिक, भोपाल बायपास का निर्माण बीओटी (Build-Operate-Transfer) योजना के अंतर्गत ट्रांसट्राय कंपनी ने 304 करोड़ रुपये की लागत से किया था। कंपनी ने 2013 से 11 दिसंबर 2019 तक लगभग 150 करोड़ रुपये टोल वसूली की ।
इसके बाद शासन द्वारा यूजर फी योजना के नाम पर अब तक लगभग 360 करोड़ रुपये वसूल किए जा चुके है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सड़क का निर्माण निजी कंपनी ने बीओटी अनुबंध के अंतर्गत किया और शासन ने निर्माण पर कोई राशि खर्च नहीं की, तो इंडियन टोल एक्ट की धारा 2 के अंतर्गत यूजर फी योजना का वैधानिक अधिकार नहीं है ?
यूजर फी योजना उन सड़कों पर लागू की जा सकती है , जिसका निर्माण केंद्र शासन या राज्य शासन की निधि से किया जाता है । क्यों निरस्त हुआ 241.97 करोड़ रुपये की वसूली का प्रकरण ? कौन जिम्मेदार ?
श्री सकलेचा के अनुसार, कंपनी द्वारा अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन के मामले में अनुबंध निरस्त किए जाने के लगभग दो वर्ष बाद, 9 जुलाई 2020 को मिसरोद थाने में अपराध क्रमांक 294/2020 दर्ज किया गया।
इसमें 241.97 करोड़ रुपये की वसूली से संबंधित आरोप शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में लगभग तीन वर्षों तक आरोपपत्र पेश नहीं किया गया और अंततः मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने 28 नवंबर 2023 को संबंधित आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी।
सकलेचा का कहना है कि शासन ने इस आदेश को सक्षम उच्चतर न्यायालय में चुनौती नहीं दी। शासन ने कंपनी से सांठगांठ कर प्रकरण की पैरवी, दस्तावेजों की उपलब्धता और कानूनी कार्रवाई में गंभीर चूक कर कंपनी को 300 करोड़ का सीधा लाभ पहुंचाया ।
सवाल यह है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार प्रीमियम क्यों नहीं वसूला? श्री सकलेचा ने अनुबंध के आर्टिकल 26 का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी से वर्ष 2013 से प्रतिवर्ष 21 करोड़ रुपये तथा निर्धारित 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के अनुसार प्रीमियम अथवा ओकंसेशन फीस ली जानी थी।
उनके अनुसार, अनुबंध में निर्धारित समय-सीमा के बावजूद लगातार छह वर्षों तक प्रीमियम की वसूली नहीं की गई।उन्होंने सवाल किया कि यदि अनुबंध के अनुसार प्रीमियम वसूला जाना था, तो संबंधित विभाग ने समय पर वसूली क्यों नहीं की?
राज्यपाल को अधूरी या भ्रामक जानकारी देने का आरोप : श्री सकलेचा ने आशंका व्यक्त की कि विभागीय अधिकारियों ने अधिसूचना जारी कराने के लिए राज्यपाल के समक्ष तथ्य अधूरे अथवा भ्रामक रूप में प्रस्तुत किए हो सकते हैं।
उन्होंने मांग की कि अधिसूचना जारी करने के लिए प्रस्तुत प्रस्ताव, विभागीय अभिमत, विधि विभाग की राय और संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए। तथा पूर्ववर्ती तारीख से टोल वसूली की अनुमति देने का कानूनी आधार सार्वजनिक किया जाए।
अनुबंध के आर्टिकल 26 के अंतर्गत प्रीमियम वसूली में हुई कथित चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। कंपनी के खिलाफ सक्षम उच्चतर न्यायालय में वाद दायर किया जाए एवं भोपाल बाईपास पर टोल वसूली तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए।
पूर्व विधायक श्री सकलेचा ने कहा कि भोपाल बायपास का मामला केवल टोल वसूली का नहीं, बल्कि सार्वजनिक जवाबदेही, अनुबंध पालन और कानून के शासन का भी प्रश्न है।
इस संबंध में टांस ट्राय भोपाल बायपास टोल वेज प्रायवेट लिमिटेड के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया है। हम उनका पक्ष भी समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।
– अमिताभ पाण्डेय

