छिंदवाड़ा
छिंदवाड़ा जिले में परासिया विकासखंड के गुड़ी-अंबाड़ा स्थित हिंगलाज माता मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर, दक्षिण दिशा में प्राकृतिक वादियों के बीच बसा यह शक्तिपीठ, देश के उन गिने-चुने मंदिरों में विशेष स्थान रखता है, जहां आदिशक्ति माता हिंगलाज विराजमान हैं।
नवरात्रि के इस पावन पर्व पर मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा है। प्रशासन द्वारा दर्शनार्थियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है और पुलिस बल तैनात किया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए यहां एक विशाल मेले का आयोजन भी किया गया है। मंदिर की मान्यताओं और परंपराओं के बारे में जानकारी देते हुए हमारे संवाददाता ने बताया कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थित पवित्र जल कुंड विशेष आस्था का केंद्र है।
अनवरत बहते इस निर्मल जल से चरण पखार कर ही भक्त गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। नवरात्रि के अवसर पर यहां प्रज्वलित किए जाने वाले हजारों अखंड ज्योति कलश, मंदिर की आध्यात्मिक छटा को और भी आलोकित कर देते हैं। इस सिद्ध पीठ का इतिहास कई चमत्कारों और जनश्रुतियों से जुड़ा है।

मंदिर से जुड़ी कुछ ख़ास बातें
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ब्रिटिश काल में जब एक कोयला खदान संचालक ने माता की प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया था, तब खदान धंसने की घटना हुई थी। श्रद्धालु इसे माता की शक्ति और उनके साक्षात होने का प्रमाण मानते हैं।
इसके अतिरिक्त, राजस्थान के काठियावाड़ राजघराने की कुलदेवी होने के कारण भी इस शक्तिपीठ का राष्ट्रीय स्तर पर विशेष धार्मिक महत्व है।
कुल मिलाकर, शांति और आध्यात्मिकता का यह केंद्र आज भी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बना हुआ है, जहां दूर-दराज से आने वाले भक्त अपार श्रद्धा के साथ माता के दरबार में शीश नवाते हैं।





