नकली खाद बेचने वाले पर कार्यवाही हो : दिग्विजय सिंह 

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भोपाल। 

राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राजगढ़ जिले में नकली खाद बेचे जाने के गंभीर प्रकरण को लेकर राज्य सरकार और कृषि विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं।

 उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि यह मामला न केवल किसानों के आर्थिक शोषण का है, बल्कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी भारतीय जन उर्वरक परियोजना की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

श्री सिंह ने बताया कि गत माह राजगढ़ जिले के ग्रामीण अंचल के दौरे के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी को ग्राम नाईपुरिया के किसानों ने शिकायत की कि उनके द्वारा खरीदी गई सिंगल सुपर फास्फेट खाद में भारी मात्रा में रेत मिली हुई है, जिससे फसलों को गंभीर नुकसान होने की आशंका है।

किसानों की शिकायत पर तत्काल उर्वरक निरीक्षक एवं वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, ब्यावरा को मौके पर बुलाकर खाद का पंचनामा तैयार कराया गया। इसके बाद कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ ब्यावरा स्थित “मध्यप्रदेश किसान बीज भंडार” नामक दुकान पर छापामार कार्यवाही की गई। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित फर्म का पंजीयन निलंबित कर दिया गया तथा उर्वरक विक्रय का लाइसेंस निरस्त किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि दुकानदार नीरज गुप्ता किसानों को खाद की बोरी चार सौ से पाँच सौ रुपये अधिक कीमत पर बेच रहा था तथा विक्रय की रसीद भी नहीं दी जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, राजगढ़ के निर्देश पर 7 नवंबर 2025 को संबंधित विक्रेता के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की विभिन्न धाराओं में एफ.आई.आर. दर्ज की गई।

कृषि विभाग द्वारा जब्त खाद के नमूने जबलपुर स्थित फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल लेबोरेटरी भेजे गए। लेबोरेटरी के असिस्टेंट केमिकल स्पेशलिस्ट ने 15 दिसंबर 2025 को अपनी जांच रिपोर्ट में खाद को अमानक घोषित किया। रिपोर्ट के अनुसार सुपर फास्फेट खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटैशियम की मात्रा अत्यंत कम पाई गई। यह रिपोर्ट विभाग को प्राप्त होने के बावजूद अब तक खाद की गुणवत्ता को लेकर कोई नई एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई है।

श्री सिंह ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर तथ्य है कि जिस खाद की बोरियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और किसानों के लिए संदेश अंकित है, वही खाद किसानों को ठगने का माध्यम बन रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकली खाद का अवैध व्यापार चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित दुकानदार के पास सुपर फास्फेट बेचने का लाइसेंस तक नहीं था, बावजूद इसके वह खाद बेच रहा था। दुकानदार के बयान के अनुसार खाद भोपाल स्थित निर्माता कंपनी ‘कोरामंडल इंटरनेशनल लिमिटेड’ के स्टॉक से खरीदी गई थी।

पूर्व विधायक द्वारा कराई गई निजी प्रयोगशाला की जांच में भी खाद को गुणवत्ताविहीन पाया गया है। नकली खाद खरीदने वाले किसानों में सरकार की खाद वितरण प्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है। एक ओर सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है, वहीं दूसरी ओर निजी दुकानदार मनमानी कीमतों पर नकली खाद बेचकर किसानों को लूट रहे हैं।

सांसद श्री सिंह ने कहा कि राजगढ़ जिले में उजागर हुआ यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश में नकली खाद के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है। उन्होंने मांग की कि ऐसे कालाबाजारियों और दोषी कंपनियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे कठोर प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए।

Dr Mohan Yadav

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से मांग करते हुए लिखा कि खाद निर्माता कोरामंडल इंटरनेशनल लिमिटेड के खिलाफ तत्काल एफ.आई.आर. दर्ज की जाए। कंपनी के साथ किया गया शासकीय अनुबंध निरस्त किया जाए। कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। नकली खाद खरीदने वाले किसानों को क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा दिया जाए। तथा मध्यप्रदेश के सभी जिलों में विशेष जांच अभियान चलाकर कोरामंडल सहित अन्य कंपनियों द्वारा बेचे गए सुपर फास्फेट खाद की समयबद्ध जांच कराई जाए।

श्री सिंह ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी स्तर पर दोषियों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

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