सही जवाब चाहते हैं कोयले से जुड़े सवाल

ApniKhabar

भोपाल।

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) जबलपुर का ईंधन प्रबंधन विभाग सूचनाओं की जानकारी नहीं देना चाहता है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जानकारी को देना नहीं चाहते हैं। यही कारण है कि सूचना के अधिकार अन्तर्गत मांगी गईं जानकारी को देने में विलम्ब किया जा रहा है। अपीलीय अधिकारी 24 घंटे से भी कम समय में कार्यालय में सुनवाई के लिए पहुंचने का नोटिस भेज रहे हैं। इस नोटिस में साफ लिखा है कि “यदि आप निश्चित तिथि और समय पर उपस्थित नहीं हुए तो प्रकरण में एक पक्षीय निर्णय ले लिया जावेगा।”

अपीलीय अधिकारी का नोटिस आवेदक को स्पीड पोस्ट से भोपाल में 19 जनवरी 2026 को दोपहर 1.45 बजे मिला। नोटिस में 20 जनवरी की शाम 4 बजे जबलपुर कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश थे। 

अपीलीय अधिकारी 24 घंटे से कम समय देकर क्या यह निश्चित करना चाहते थे कि आवेदक अनुपस्थित रहे ताकि प्रकरण में एक पक्षीय निर्णय लिया जा सके?

उल्लेखनीय है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत दायर RTI और उसके बाद की प्रथम अपील के दौरान जो तथ्य सामने आए वो ऐसा  संकेत देते हैं कि कोयला परिवहन, गुणवत्ता जांच और सैंपलिंग की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है ।

यहां यह बताना जरूरी है कि भोपाल निवासी अमिताभ पाण्डेय द्वारा MPPGCL जबलपुर में RTI आवेदन दिया गया। 

इसमें हसदेव क्षेत्र की Khurja UG, Haldibadi UG और Behraband माइंस से RCR Mode के माध्यम से संजय गांधी ताप विद्युत गृह (SGTPP) के लिए किए गए कोयला परिवहन से संबंधित  जानकारियाँ मांगी गई थीं।

RTI के बाद जब सूचना अधूरी मिली तो प्रथम अपील दायर की गई। इसी प्रथम अपील में विभाग के अपीलीय अधिकारी द्वारा श्री पाण्डेय को नोटिस दिनांक 15 जनवरी 2026 जारी किया गया ।

यह नोटिस 19 जनवरी 2026 को दोपहर 1:45 बजे अपीलकर्ता को प्राप्त हुआ, जिसमें सुनवाई 20 जनवरी 2026 को शाम 4 बजे जबलपुर में किए जाने के निर्देश थे ।

सवाल यह है क्या कोई सामान्य नागरिक एक दिन से भी कम समय में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर सभी दस्तावेज़ों के साथ सुनवाई में उपस्थित हो सकता है? या फिर यह जल्दबाज़ी जानबूझकर की गई ? 

क्या इसका मतलब यह था कि अपीलकर्ता आवेदक उपस्थित नहीं हो सके और मामला औपचारिक रूप से निपटा दिया जाए ?

इसके बावजूद आवेदक अमिताभ पाण्डेय  जनहित को प्राथमिकता देते हुए, निर्धारित तिथि और समय पर जबलपुर पहुंच गए । उन्होंने अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी।

इस बैठक में उनके साथ वरिष्ठ पत्रकार शुरैह नियाज़ी भी  उपस्थित रहे जिनकी टीम मैदानी स्तर पर इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अलग अलग साइडिंग पर लगातार नजर रख रही है। 

श्री पाण्डेय ने RTI आवेदन में जिन प्रमुख जानकारियों की मांग की गई थी, उनमें शामिल था – ट्रांसपोर्टरों को जारी वर्क ऑर्डर

SECL से प्राप्त DO (Delivery Order) का आवंटन GPS मॉनिटरिंग एजेंसी का आदेश BBSB साइडिंग पर गुणवत्ता जांच हेतु अधिकारियों के टूर रिपोर्ट साइडिंग पर रखे कोयले की तिथि-वार गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट लेकिन विभाग द्वारा स्पष्ट और पूरी  जानकारी नहीं दी गई।

लोक सूचना अधिकारी सचिन साहू द्वारा दिए गए जवाब में – कई बिंदुओं पर कोई सूचना नहीं दी गई। 

कई बिंदुओं पर असंबंधित, सामान्य और अस्पष्ट उत्तर दिया गया। 

RTI के जवाब में GPS मॉनिटरिंग से संबंधित –

  • किसी एजेंसी का नाम
  • कोई आदेश
  • लॉगिन ID / पासवर्ड
  • रिपोर्ट
  • या अनुपालन रिकॉर्ड

उपलब्ध नहीं कराया गया।

जबकि कार्यादेश की शर्तों में स्पष्ट रूप से –

  • रियल टाइम व्हीकल ट्रैकिंग
  • जियो-फेंसिंग
  • SMS/ई-मेल अलर्ट
  • एनालिटिकल रिपोर्ट
  • GPS से छेड़छाड़ पर दंडात्मक प्रावधान का उल्लेख है।

सूत्रों के अनुसार, इनमें से किसी भी शर्त के पालन का ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे यह आशंका गहराती है कि GPS मॉनिटरिंग केवल कागज़ों तक सीमित है।

BBSB, KJZ, ACLA, PHEC,GPCK, PMBG, PRPI, Vimla, BTBR, DUMRI साइडिंग पर सैंपलिंग और निरीक्षण: रिकॉर्ड गायब

RTI में BBSB साइडिंग पर—

  • कितनी बार निरीक्षण हुआ ?
  • कितनी बार सैंपलिंग की गई ?

क्या वीडियो ग्राफी कराई गई ?

इस प्रकार की जानकारियाँ मांगी गई थीं।

इसके जवाब में विभाग ने कहा – “कोयले की गुणवत्ता जांच खदान छोर और पावर हाउस छोर पर तृतीय पक्ष एजेंसी द्वारा की जाती है।”

जबकि कार्यादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि MPPGCL अपने अधिकारियों को साइडिंग पर भी गुणवत्ता जांच और सैंपलिंग के लिए तैनात कर सकता है।

यह उत्तर संतोषप्रद नहीं है , बल्कि इससे यह भी संदेह पैदा होता है कि क्या साइडिंग स्तर पर गुणवत्ता जांच को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया ?

 उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा कई जानकारियों को RTI अधिनियम की धारा 8(1)(d) के तहत रोक दिया गया।

RTI विशेषज्ञों के अनुसार –

DO आवंटन

निरीक्षण / यात्रा प्रतिवेदन

गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट

किसी भी स्थिति में व्यापारिक गोपनीयता नहीं मानी जा सकतीं, क्योंकि यह पूरा मामला सार्वजनिक धन, सार्वजनिक संसाधन (कोयला) और बिजली उत्पादन से जुड़ा है।

आर टी आई आवेदन की सुनवाई के दौरान जब अपीलीय अधिकारी ने सवाल किया –

“आप कैसे साबित करेंगे कि कोयला खुले बाजार में बिक रहा है?”

तो अमिताभ पाण्डेय और शुरैह नियाज़ी ने उसी समय, उसी तारीख पर संयुक्त निरीक्षण (Joint Inspection) की खुली पेशकश कर दी।

उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया – 1.20 लाख मीट्रिक टन कोयले का सेल ऑर्डर केवल जय अम्बे को दिया गया है।

उस सेल ऑर्डर की शेष मात्रा आज की तारीख में लगभग 35,000 मीट्रिक टन होनी चाहिए लेकिन यह कोयला BBSB साइडिंग पर मौजूद ही नहीं है।

सीधा सवाल यह है – यदि कोयला साइडिंग पर नहीं है, तो आखिर गया कहाँ ?

इस संबंध में आवेदक ने वीडियो सबूत भी अपीलीय अधिकारी को बताए।

इसके साथ ही यह भी बताया गया कि जो वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, वो यह दिखाते हैं कि RCR कोयला वॉश कोल खुले बाजार में बेचा जा रहा है।

लोडिंग एंड पर, जहाँ केमिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य होती है, वहाँ जानबूझकर केमिस्ट नहीं रखे गए।

सैंपलिंग केवल इंजीनियर से कराई जा रही है, ताकि गुणवत्ता को “मैनेज” किया जा सके, वही इंजीनियर बिना उचित जांच टिपर को अनुमति देते हैं।

GPS और Geo-fencing की जांच नहीं करते।

सीलिंग, ट्रैकिंग और निगरानी की प्रक्रिया का पालन नहीं होता

सूत्रों के अनुसार –

“ना GPS , ना Geo-fencing ,

ना केमिस्ट , ना सैंपलिंग की पारदर्शिता , ना सीलिंग—

फिर भी कोयला बाहर जा रहा है।”

यह सब उस समय हो रहा है जब MPPGCL स्वयं दावा करता है कि वह हज़ार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कोयले का प्रबंधन करता है।

अब सबसे गंभीर सवाल यही है कि क्या जबलपुर का ईंधन प्रबंधन विभाग RTI अधिनियम, नियमों और कानून का पूरी तरह पालन नहीं करना चाहता है? 

क्या यह आर टी आई के आवेदन का जवाब देने की पूरी प्रक्रिया केवल औपचारिकता निभाने और फाइल बंद करने हो रही है ?

अब निगाहें अपीलीय अधिकारी की अगली कार्रवाई पर है। 

RTI, प्रथम अपील, दस्तावेज़, सुनवाई, संयुक्त निरीक्षण की पेशकश और वीडियो सबूतों के बाद  यह मामला केन्द्रीय कोयला मंत्रालय, सी बी आई , मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री सहित उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया है। 

 इस मामले से जुड़े सवाल मध्यप्रदेश विधानसभा के 16 फरवरी से प्रारंभ हो रहे बजट सत्र में में आने वाले हैं। 

अब देखना यह है कि—

क्या उच्च स्तर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी?

क्या संयुक्त निरीक्षण वास्तव में कराया जाएगा?

या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन कर दिया जाएगा ?

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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