भोपाल । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने विधान सभा में 18 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत मध्य प्रदेश सरकार के बजट को गरीबी ,महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता के लिए निराशाजनक निरूपित किया है। भाकपा ने बजट के प्रस्तावों में जनहित से जुड़ी भाकपा की मांगों की उपेक्षा करने पर मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की कड़ी भर्त्सना की है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश के राज्य सचिव कॉमरेड शैलेन्द्र शैली ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि ” मध्य प्रदेश सरकार के बजट में गरीबी ,महंगाई और बेरोजगारी दूर करने के लिए कोई प्रभावकारी प्रस्ताव नहीं है। पेट्रोलियम पदार्थों पर मध्य प्रदेश सरकार ने अपना भारी टैक्स कम नहीं किया।भाजपा द्वारा चुनावों के लिए किए गए वादे भी पूरे नहीं किए गए।मध्य प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी में सरकारी नौकरी बन्द है ।
विभिन्न विभागों में लाखों पद रिक्त हैं,लेकिन सरकार ने सिर्फ पुलिस विभाग में 22 हजार पदों और शिक्षा विभाग में 15 हजार पदों पर नियुक्ति करने का प्रस्ताव किया है।किसानों को उनकी फसल का समर्थन मूल्य देने का कोई प्रावधान नहीं है।सरकार ने राज्य परिवहन निगम पुनः शुरू करने के लिए मैदानी ढांचा तैयार करने के लिए भी बजट में कोई कार्य योजना नहीं बनाई है।मध्य प्रदेश के सरकारी विश्व विद्यालयों की खस्ता हालत दुरुस्त करने के लिए भी बजट में कोई प्रावधान नहीं है।
सरकारी संसाधनों और बजट का दुरुपयोग बन्द करने की दशा में भी सरकार गंभीर नहीं है। सरकार द्वारा अनावश्यक कर्ज मांगने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए भी सरकार गंभीर नहीं है।स्वास्थ्य विभाग के लिए 23 हजार 747 करोड़ रुपये और आयुष्मान योजना के लिए 2149 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है,लेकिन आयुष्मान योजना में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने हेतु सरकार गंभीर नहीं है। स्वास्थ विभाग के लिए आवंटित राशि का सदुपयोग सरकारी संसाधनों की मजबूती और पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति के लिए होना चाहिए।
संस्कृति के लिए आवंटित बजट का दुरुपयोग भाजपा सरकार सांप्रदायिक आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रतिगामी एजेंडा लागू करने के लिए करती है।इस पर रोक लगाना चाहिए।एक धर्म विशेष के धार्मिक आयोजनों और तीर्थ यात्रा के लिए भारी भरकम बजट का प्रस्ताव भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।इसे रोकना चाहिए।
भाजपा ने मध्य प्रदेश सरकार को बजट के पूर्व प्रेषित जन हित से जुड़ी मांगों में समान काम का समान वेतन देने ,न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए सुनिश्चित करने ,ठेका प्रथा, आउट सोर्सिंग बन्द करने,वरिष्ठ नागरिकों और निराश्रितों को 5 हजार रुपए मासिक पेंशन देने ,सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार भोपाल के गैस पीड़ितों को सरकार की तरफ से अधिकतम मुआवजा देने, प्रत्येक गैस पीड़ित निराश्रित को 5 हजार रुपए मासिक पेंशन देने,मध्य प्रदेश विद्युत मण्डल पुनः शुरू करने के लिए बजट आवंटित करने ,चतुर्थ श्रेणी में सरकारी नौकरी पुनः शुरू करने जैसी मांगें की हैं ।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में रिक्त लाखों पदों पर स्थाई नियुक्ति करने की भी माँग कई बार की है,लेकिन मध्य प्रदेश सरकार के बजट में जन हित की इन मांगों की उपेक्षा की गई है।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इसकी कड़ी भर्त्सना करती है। “





