बिल्लू भैया: रिटायर बट नाट टायर्ड

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भोपाल। जिंदगी के सफर में आए दिन जानें, अनजाने लोगों से मेल मुलाकात होती है। उनमें से कुछ लोग भूल जाते हैं, कुछ याद रह जातें हैं। जो याद रहते हैं वे भले ही महीनों, सालों तक न मिलें लेकिन उनका ख़याल, उनका जिक्र सूकून देने वाला , उत्साह बढ़ाने वाला होता है।
बिल्लू भैया ऐसे ही खुशमिजाज, मददगार और दोस्तों के दोस्त हैं। उन्होंने सरकारी नौकरी में रहते हुए हमेशा काम को पूरी जिम्मेदारी से पूरा किया। आज वे सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त हो गए हैं। इन दिनों शासकीय सेवा के दौरान बहुत कम अधिकारी ऐसे हैं जो बैदाग रिटायर हो जाते हैं।
राज्य शासन के जिम्मेदार पद पर लगभग 40 साल सेवाएं देने के बाद बैदाग रिटायर होकर बिल्लू भैया जिस गरिमामय तरीके से सेवानिवृत्त हुए उस पर हम सभी बहुत गर्व का अनुभव करते हैं।
बिल्लू भैया अर्थात अरविंद सिंह भाल जो राज्य प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी हैं।
जिनको हमारे साथी संजय सक्सेना आत्मीय भाव से उस्ताद कहकर पुकारते हैं । बिल्लू भैया के लिए संजीव शर्मा – संजय परसाई , प्रवीण दुबे के पास दादा या भाई साहब जैसे संबोधन हैं ।
भैया के चाहने वालों की सूची बड़ी लम्बी है जो मध्यप्रदेश के बाहर अन्य कई राज्यों में फैले हुए हैं।
बहरहाल आज जब बिल्लू भैया सेवानिवृत्त हुए तो फिर पुराने शुभचिंतकों ने उनके लिए सुख , समृद्धि भरे लम्बे स्वस्थ जीवन की कामना की ।
इस मौके पर साथी संजय सक्सेना ने कुछ इस तरह अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
” आज हमारे उस्ताद घर लौट रहे हैं… । आज उनकी सरकारी सेवा का अंतिम दिन है। यह सिर्फ एक सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि एक पूरे दौर का विराम है।
आज के बाद शायद उनके मुंह से वह अपनापन भरी आवाज सुनने को नहीं मिलेगी — “बहुत परेशानी है दादा…”
या फिर मुस्कुराते हुए कहा गया उनका मशहूर वाक्य — “मेडम ने प्राण लेकर रखे हैं।”
लंबी और समर्पित सरकारी सेवा के बाद हमारे अपने बिल्लू भैया (श्री अरविंद सिंह भाल) आज शासकीय जिम्मेदारियों से मुक्त हो रहे हैं। लेकिन सच तो यह है कि सेवा से भले ही छुट्टी मिल जाए, लोगों के दिलों में बनाई गई जगह से कभी रिटायरमेंट नहीं होंगे।
भैया ने अपने काम से ज्यादा रिश्ते कमाए हैं — और वही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
हम सब दोस्तों के लिए बिल्लू भैया सिर्फ एक दोस्त नहीं रहे। उनका किरदार कुछ वैसा ही रहा, जैसा 3 इडियट्स में आमिर खान का था — रास्ता दिखाने वाला, भरोसा जगाने वाला और सही समय पर सही हाथ पकड़ लेने वाला। इस उस्ताद ने हम जैसे “भर्ती के नटों” को ऐसी जगह फ़ीट किया कि आज लगता है, शायद हमारी जगह वहीं पहले से तय थी।
वह एक दोस्त रहे…
एक मार्गदर्शक रहे…
एक सलाहकार, एक संरक्षक और कई बार तो अभिभावक से भी बढ़कर।
हम सबके लिए बिल्लू भैया सच में “जमीनी खुदा” जैसे रहे हैं — जो डांटते भी थे, संभालते भी थे और जरूरत पड़ने पर सबसे आगे खड़े भी मिलते थे।
आज जब वह अपने कार्यालय महिला वित्त विकास निगम से रवानगी लेंगे, तो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं जाएगा — बल्कि उस कार्यालय की रौनक, उसका अनुभव और उसका आत्मविश्वास भी उनके साथ कदम बाहर रखेगा।
सच तो यह है कि उनके जाने के बाद निगम की दीवारें भी उन्हें जरूर याद करेंगी। निगम खुद अपनी अंतिम सांस लेने के लिए जद्दोजहत करेगा।
आज यादों का पिटारा अपने आप खुल गया है। साथ बिताए अनगिनत पल, हंसी-मजाक, परेशानी के दिन और समाधान के वो अंदाज — सब आंखों के सामने घूम रहे हैं।
सबसे बड़ी बदकिस्मती यही रहेगी कि उन्हें विदा करने के उस पल में हममें से कोई साथ नहीं होगा।
आज के लिए बस दिल से शुभकामनाएँ —
क्योंकि विदाई अंत नहीं होती, यह एक नई शुरुआत होती है।
फिर मिलेंगे…
खूब मिलेंगे…
जमकर मिलेंगे…
तब तक आप स्वस्थ रहें, मस्त रहें और हमेशा की तरह व्यस्त रहें।
क्योंकि उस्ताद… आप रुकने वालों में से नहीं हैं। “
बिल्लू भैया की सेवानिवृत्त के बाद समाजसेवा के जो काम शुरू होने वाले हैं वो हम सबको फिर एकत्र करेंगे।
सबको इसका इंतजार है।

( अमिताभ पाण्डेय )

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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