नई दिल्ली ।
सुप्रीम कोर्ट ने पिटीशनर पारस सकलेचा की लेबड जावरा, जावरा नयागांव, टोल रोड पर लागत से कई गुना वसूली को लेकर इन्दौर हाईकोर्ट द्वारा पिटीशन को खारिज करने के आदेश को निरस्त करते हुए , उस पर फिर से सुनवाई कर तीन माह में निर्णय करने का आदेश दिया है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व विधायक और शिक्षाविद् सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट में इंदौर हाईकोर्ट द्वारा पिटीशन को खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी ।

इस संबंध में चीफ जस्टिस सूर्यकांत तथा न्यायाधीश जोयमाल्या की खण्डपीठ ने 9 मार्च 2026 को पूर्व विधायक पारस सकलेचा की पिटीशन पर सुनवाई की ।
पिटीशनर ने बताया कि जनवरी 2026 तक जावरा नयागांव टोल रोड पर लागत 426 करोड़ के स्थान पर 2635 करोड़, लेबड जावरा पर 589 करोड़ के स्थान पर 2376 करोड़ तथा देवास भोपाल टोल रोड पर 345 करोड़ के स्थान पर 2056 करोड़ टोल वसूला जा चुका है । कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर द्वारा रखरखाव खर्च और ब्याज को फिजिकल रिपोर्ट में दिए खर्च से कई गुना बड़ा चढ़कर बताया जा रहा है ।
तीनों रोड पर जनवरी 2026 तक 10 हजार 691 दुर्घटनाएं हो चुकी है , जिसमें 8 हजार 314 घायल तथा 3 हजार 821 लोगों की मृत्यु हुई है । वास्तविक वसूली के अनुसार 2016-17 तक तीनों कंपनी की लागत रखरखाव ब्याज के बाद 140 करोड़ से 320 करोड़ तक लाभ हो रहा है । जबकि लेबड जावरा पर दिसंबर 2038 तक तथा जावरा नयागांव और देवास भोपाल पर दिसंबर 2033 तक टोल और वसूला जाएगा ।
पिटीशनर श्री सकलेचा की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक विवेक कृष्ण तंखा , डॉ सर्वम रीतम खरे , विपुल तिवारी , इंद्रदेव सिंह तथा शासन की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह , हरमित सिंह रूपराह , कनिष्क शर्मा, करण सिंह उपस्थित हुए ।
पिटीशनर ने इस प्रकरण में देवास भोपाल टोल रोड को भी शामिल करने तथा जनवरी 2026 तक के टोल संग्रहण तथा दुर्घटना के आंकड़े और अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति का अनुरोध किया। तथा नोएडा ब्रिज पर टोल वसुली निरस्त करने के आदेश दिनांक 20 दिसंबर 2024 , तथा मंदसौर ब्रिज पर टोल वसूली पर आदेश दिनांक 2001 के प्रकाश में इस पिटीशन पर आदेश देने का अनुरोध किया ।
न्यायालय ने इस पिटीशन की कार्यवाही को नोएडा ब्रिज पर टोल निरस्त करने के 20 दिसंबर 2024 के समकक्ष मानते हुए आदेश दिया कि पारस सकलेचा द्वारा इंदौर हाईकोर्ट में अप्रैल 2022 मे दाखिल पिटीशन को फिर से सुनकर तीन माह में निर्णय किया जाय ।
पिटीशनर को सुविधा दी की वह इंदौर हाईकोर्ट में 15 दिन में नया आवेदन दाखिल करें तथा टोल रोड के निवेशकों को , तथा उन सभी को जिनके हित प्रभावित हो रहे हैं , पार्टी बनाये ।

उल्लेखनीय की नोएडा ब्रिज पर 2001 से टोल वसूली को लेकर नोएडा निवासी वेलफेयर एसोसिएशन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी । माननीय हाईकोर्ट ने नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) को 4 सप्ताह में टोल कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर द्वारा दी गए रिपोर्ट का परीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
कैग ने अपने प्रतिवेदन में बताया की टोल कंपनी ने निवेशक को आरबीआई की पॉलिसी के विपरीत 25% डिविडेंड दिया। कंपनी ने वित्तीय संपत्ति की सुरक्षा के सिद्धांत के अनुरूप प्रोजेक्ट कॉस्ट और खर्च पर कंट्रोल नहीं किया। योजना की लागत 281.2 करोड़ के स्थान पर 325.29 करोड़ बताई तथा कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर ने प्रमाण पत्र देकर प्रोजेक्ट कॉस्ट को 407.64 करोड़ बताया।
इंडिपेंडेंट ऑडिटर ने 2001 से लेकर 2016 तक रखरखाव खर्च को एनएचएआई तथा एम ओ आर टी एच के स्टैंडर्ड के विपरीत बढ़ा चढ़ा कर 272.40 करोड़ बताया । जो कि फिजीबिलीटी रिपोर्ट में बताएं गये खर्च से काफी ज्यादा है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि टोल कंपनी ने 31 जून 2016 तक कुल खर्च 1136.26 करोड़ तथा कुल आय 1103 करोड़ तथा 15 करोड़ शेष बताया।
कंपनी ने खर्चे में लागत मूल्य तथा अन्य अनावश्यक खर्च को काफी बढ़ा चढ़ाकर जोड़ा। कैग की रिपोर्ट के आधार पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 26 अक्टुम्बर 2016 को टोल वसूली निरस्त कर दी। कंपनी ने उच्चतम न्यायालय में उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय को चुनौती दी । उच्चतम न्यायालय ने 20 दिसंबर 2024 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्णय को यथावत रखते हुए कंपनी की पिटीशन को खारिज कर दिया ।
– अमिताभ पाण्डेय




