राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि “हिंदू” एक संज्ञा नहीं, बल्कि एक विशेषण है। मुंबई में कल संघ के शताब्दी समारोह में उन्होंने कहा कि “हिंदू” एक सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान है। उन्होंने कहा कि भारत में सभी नागरिक अपने वर्तमान धर्म से अलग एक ही वंश और सांस्कृतिक विरासत साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि “हिंदू” शब्द को थोपी गई पहचान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि यह भारत की संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए एक व्यापक विशेषण है जिसमें भूमि पर गर्व, इसकी संस्कृति की सराहना और पूर्वजों की साझा गौरव गाथा शामिल है।





