सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन, प्रोजेक्ट कमेटी शिमला ने वेतन विसंगतियों और अतिरिक्त कार्यभार को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय निदेशक को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा।
कर्मियों का कहना है कि उनसे लगातार अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है, जबकि उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करवाई जा रहीं। उनका आरोप है कि केंद्र और प्रदेश सरकार से मिलने वाला वेतन समय पर जारी नहीं होता, जिससे कई-कई महीनों तक भुगतान लंबित रहता है और उन्हें गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आंगनबाड़ी कर्मियों ने बताया कि पुराने और खराब मोबाइल फोन, लंबित रिचार्ज भुगतान, स्टेशनरी व किचन सामग्री की कमी, कम ढुलाई दर और प्रोत्साहन राशि में देरी के कारण उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यूनियन की प्रमुख मांग है कि जब तक विभाग द्वारा नए स्मार्ट फोन या टैबलेट उपलब्ध नहीं करवाए जाते, तब तक ऑफलाइन कार्य बंद किया जाए। उनका कहना है कि पोषण ट्रैकर से संबंधित तकनीकी समस्याओं और अन्य ऑनलाइन रिपोर्टिंग कार्यों में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मांगपत्र में सीबीई इंसेंटिव को ऑफलाइन बिल के आधार पर देने, पोषण ट्रैकर की तकनीकी खामियों को दूर करने, गैस सिलेंडर, वर्दी भत्ता, मेडिकल अवकाश, छुट्टियां तथा आयुष्मान कार्ड में पूरे परिवार को शामिल करने जैसी मांगें भी प्रमुखता से उठाई गई हैं। कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।




