सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में सक्षम होगा

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सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दस लाख प्रतिभाओं की कमी बताते हुए श्री वैष्‍णव ने कहा कि भारत इस प्रतिभा की मांग का अधिकांश हिस्सा देश के भीतर और बाहर दोनों जगह से पूरा करेगा। उन्होंने बताया कि 85 हजार इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था और केवल चार वर्षों में देश में 67 हजार इंजीनियरों को इस विशेषज्ञता में प्रशिक्षित किया जा चुका है। देश में 315 विश्वविद्यालयों में विद्या‍र्थी चिप निर्माण प्रक्रियाओं को डिजाइन और विकसित कर रहे हैं।

सेमीकंडक्टर 2.0 के अन्‍तर्गत चिप डिजाइन, उपकरण और सामग्री निर्माण तथा चिप से लेकर मदरबोर्ड तक संपूर्ण प्रणाली को डिजाइन करने में सक्षम प्रतिभाओं का समूह तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से भारत 7, 3 और 2 नैनोमीटर चिप्स का निर्माण देश के भीतर ही कर सकेगा।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दस लाख प्रतिभाओं की कमी बताते हुए श्री वैष्‍णव ने कहा कि भारत इस प्रतिभा की मांग का अधिकांश हिस्सा देश के भीतर और बाहर दोनों जगह से पूरा करेगा। उन्होंने बताया कि 85 हजार इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था और केवल चार वर्षों में देश में 67 हजार इंजीनियरों को इस विशेषज्ञता में प्रशिक्षित किया जा चुका है। देश में 315 विश्वविद्यालयों में विद्या‍र्थी चिप निर्माण प्रक्रियाओं को डिजाइन और विकसित कर रहे हैं।

सेमीकंडक्टर 2.0 के अन्‍तर्गत चिप डिजाइन, उपकरण और सामग्री निर्माण तथा चिप से लेकर मदरबोर्ड तक संपूर्ण प्रणाली को डिजाइन करने में सक्षम प्रतिभाओं का समूह तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से भारत 7, 3 और 2 नैनोमीटर चिप्स का निर्माण देश के भीतर ही कर सकेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। भारत की यह प्रगति अन्य देशों को संपूर्ण समाधान प्रदान कर सकती है। उन्होंने कल बेंगलुरु में क्वालकॉम निर्मित 2 नैनोमीटर सेमीकंडक्टर चिप का अनावरण करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह बात कही। श्री वैष्‍णव ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में सक्षम होगा।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दस लाख प्रतिभाओं की कमी बताते हुए श्री वैष्‍णव ने कहा कि भारत इस प्रतिभा की मांग का अधिकांश हिस्सा देश के भीतर और बाहर दोनों जगह से पूरा करेगा। उन्होंने बताया कि 85 हजार इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था और केवल चार वर्षों में देश में 67 हजार इंजीनियरों को इस विशेषज्ञता में प्रशिक्षित किया जा चुका है।

देश में 315 विश्वविद्यालयों में विद्या‍र्थी चिप निर्माण प्रक्रियाओं को डिजाइन और विकसित कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर 2.0 के अन्‍तर्गत चिप डिजाइन, उपकरण और सामग्री निर्माण तथा चिप से लेकर मदरबोर्ड तक संपूर्ण प्रणाली को डिजाइन करने में सक्षम प्रतिभाओं का समूह तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से भारत 7, 3 और 2 नैनोमीटर चिप्स का निर्माण देश के भीतर ही कर सकेगा।

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