मंत्री जी, किसको लाभ पहुंचाने के लिए बने समाज कल्याण बोर्ड ?

मध्यप्रदेश में समाज के विभिन्न वर्ग, समुदाय का कल्याण करने के लिए राज्य शासन द्वारा समाज कल्याण बोर्ड का गठन किया जाता है। ये बोर्ड जिस समाज के विकास का लक्ष्य लेकर गठित किए गए, क्या उस समाज में अंतिम पंक्ति के आदमी को, निर्धन, सामाजिक दृष्टिकोण से कमजोर व्यक्ति को इसका लाभ मिल सका ? 

यह महत्वपूर्ण सवाल है जिसका जवाब आज दिनांक 1 दिसम्बर 2025 को मध्यप्रदेश विधानसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन मिला है। 

इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से जो जवाब आया है वो यह बता रहा है कि समाज का कल्याण करने के दावे कागजों में सिमटकर रह गए हैं। अधिकांश समाज कल्याण बोर्ड में केवल अध्यक्ष ही वाहन सुविधा, वेतन, भत्ते जैसी सुविधाओं का लाभ ले पाए हैं। विभिन्न जाति -समाज के नाम पर बने बोर्ड का लाभ निर्धन, कमजोर लोगों को नहीं मिल सका।

कुछ समाज कल्याण बोर्ड में अध्यक्ष नियुक्त हो गए, कुछ बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति भी हो गई लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। बोर्ड के माध्यम से योजनाओं का लाभ गरीब, कमजोर लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। 

इस संबंध में राज्य विधानसभा में प्रश्न पूछने वाले विधायक प्रताप ग्रेवाल का कहना है कि मध्यप्रदेश में किसी भी समाज कल्याण बोर्ड को पिछले 2 साल में सरकार ने एक रुपया भी नहीं दिया है। बोर्ड के माध्यम से किसी भी समाज के एक भी व्यक्ति का लाभ नहीं हो सका।

जो बोर्ड गठित हुए उनमें अध्यक्ष की नियुक्ति हो गई उनको वाहन, मानदेय, ग्रह भत्ता मिल गया। इसके आगे कोई ऐसा काम नहीं हुआ जिसका लाभ बोर्ड की किसी योजना से आम आदमी को मिला हो। विधायक श्री ग्रेवाल के अनुसार विभिन्न समाजों के कल्याण के लिये 9 जाति – समाज आधारित बोर्ड बनाए गए। इनके लिये कुल 8.34 करोड रूपए स्वीकृत किए गए।

स्वीकृति के बाद भी इनमें से किसी भी बोर्ड को कोई राशि नहीं दी गई। इस कारण किसी भी समाज का एक भी व्यक्ति लाभान्वित नहीं हुआ। विभिन्न बोर्ड के अध्यक्ष को वाहन, मानदेय, ग्रह भत्ता और दूरभाष सुविधा मिलती रही।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी मध्यप्रदेश के तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के विधानसभा प्रश्न क्रमांक 111 के उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2023 में दो वर्ष के लिये 9 समाज के बोर्ड उस समाज के कल्याण एवं युवाओं के कौशल विकास एवं रोजगार देने के उद्देश्य से बनाये गये थे। दो वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर 17.9. 2025 को सारे बोर्ड भंग कर दिये गये तथा इसका परीक्षण नहीं किया गया कि बोर्ड बनाने का उद्देश्य पूरा हुआ या नहीं।

विधायक श्री ग्रेवाल ने प्रश्न में पूछा कि बोर्ड के गठन से लेकर बोर्ड खत्म करने तक कितनी बैठके बोर्ड में आयोजित की गई ? बैठकों में क्या रणनीति तैयार की गई ?

 इस प्रश्न के जवाब में राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने बताया कि किसी भी बोर्ड में जिला स्तर पर कोई बैठक नहीं हुई। मात्र तीन बोर्ड ने 9 सितंबर 2024 को तथा तीन बोर्ड ने फरवरी-मार्च 2025 में बैठक की।

 महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड , रजक समाज बोर्ड तथा तेल घानी कल्याण बोर्ड ने 2 साल में एक भी बैठक नहीं की। महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों को छोड़कर शेष आठ बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति समाप्त कर दी गई ।

 महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव की तो नियुक्त ही नहीं की गई और बोर्ड को भंग कर दिया गया। तेलघानी और जय मीनेष कल्याण बोर्ड में सदस्यों की नियुक्ति ही नहीं की । रजक कल्याण और वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड में 4 सदस्यों के स्थान पर मात्र एक एक सदस्य की नियुक्ति की। सभी बोर्ड में कर्मचारियों की नियुक्ति उनके गठन के डेढ़ साल बाद नवंबर 2024 में की गई और उन्हें अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच कार्य मुक्त कर दिया गया ।

श्री ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि राज्यमंत्री के उत्तर से स्पष्ट है कि चुनाव में वोट लेने के नाम पर 9 समाज कल्याण बोर्ड बनाकर समाजो से धोखाधड़ी की गई। भाजपा के पदाधिकारी को बोर्ड का अध्यक्ष एवं सदस्य नियुक्त कर उन्हें वाहन, मानदेय भत्ता, टेलीफोन आदि सुख सुविधा देकर उनसे अपना काम निकलवाया गया । 

बोर्ड के कल्याण के नाम पर संबंधित विभाग को प्राप्त 8.34 करोड़ की राशि को बोर्ड में नहीं डाला गया जिसके कारण समाजो के एक भी व्यक्ति को भला नहीं हुआ। श्री ग्रेवाल के अनुसार अब दो वर्ष बाद सरकार द्वारा बोर्ड को भंग करने से स्पष्ट है कि भाजपा ने बोर्ड के नाम पर समाजो को अपमानित करने का निंदनीय कार्य किया है।

 श्री ग्रेवाल ने कहा कि चुनाव वर्ष में अप्रैल 2023 को 15 समाज बोर्ड बनाए गए थे जिनमें से 9 कौशल विकास से अंतर्गत संचालन किए गए बोर्ड का उद्देश्य समाज के समग्र कल्याण के लिए जनहितकारी योजनाएं लागू करने संबंधी कार्यक्रम करना, युवाओं को कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा स्टार्टअप व्यवसाय हेतु ऋण की व्यवस्था करना था लेकिन इन सभी बोर्ड द्वारा कोई भी उद्देश्य के अंश मात्र भी कार्य नहीं किया गया ।

ना ही कोई रणनीति तैयार की गई , ना ही हितग्राहियों का चयन किया गया। डेढ़ साल बाद नवंबर 2024 में एक दो आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त किए गए तथा उन्हें भी मात्र 4 से 6 माह बाद कार्य मुक्त कर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने बोर्ड का गठन जिस उद्देश्य से किया वह पूरे नहीं हुए।

– अमिताभ पाण्डेय

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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