lucknow, February 4 : प्रदेश के पर्यटन रोडमैप के तहत समयबद्ध लक्ष्यों के माध्यम से वर्ष 2047 तक पर्यटन का राज्य की जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) में योगदान 5 प्रतिशत तक बढ़ाने, देश के पर्यटन जीवीए में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत करने, पर्यटक आगमन को 100 करोड़ से अधिक पहुंचाने और प्रदेश को देश के शीर्ष तीन पर्यटन राज्यों में शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यह बात पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप पर्यटन भवन, लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कही, बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी मौजूद रहे।
इस बैठक में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका को सशक्त करने और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई, वहीं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि 2027-28 तक 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने में पर्यटन एक मजबूत ग्रोथ इंजन साबित होगा और इसके लिए बुनियादी ढांचे के विस्तार, निजी निवेश बढ़ाने और पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बैठक में उत्तर प्रदेश पर्यटन के लिए तय किए गए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्रस्तुत किया गया। रोडमैप के अनुसार राज्य की जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) में पर्यटन का योगदान मौजूदा 1.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं, देश के कुल पर्यटन जीवीए में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत करने की योजना है। पर्यटन आगमन के मोर्चे पर भी बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। प्रदेश में कुल आगमन पर्यटकों की संख्या को 2047 तक 100 करोड़ से अधिक करने, विदेशी पर्यटकों की संख्या 45 लाख से अधिक तक पहुंचाने और उत्तर प्रदेश को भारत के शीर्ष तीन पर्यटन राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
’रोजगार और निवेश को नई रफ्तार’ रोजगार सृजन को लेकर भी रोडमैप काफी महत्वाकांक्षी है। कुल रोजगार में पर्यटन की हिस्सेदारी को मौजूदा 1.43 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक 5 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि, प्रति पर्यटक खर्च, हवाई यात्री यातायात, प्रीमियम होटलों की संख्या और पर्यटन से जुड़े रोजगार में निरंतर वृद्धि के लिए ठोस लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
पर्यटन नीति-2022 के तहत अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ बाबा नीम करैरी, कालिंजर फोर्ट और नैमिषारण्य जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में 5-स्टार होटल, होमस्टे, बेहतर कनेक्टिविटी और स्वच्छ वातावरण विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पर्यटन अनुभव को विश्वस्तरीय बनाया जा सके।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मा0 “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में पर्यटन को एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार, निवेश को बढ़ावा देने और पर्यटन सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने पर लगातार काम हो रहा है, ताकि पर्यटन से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिल सके।
मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि, “उत्तर प्रदेश के पास धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पर्यटन की अद्वितीय संभावनाएं हैं। सुनियोजित रोडमैप के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र में निवेश, जीवीए में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर फोकस किया गया है,
जिससे प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। अपर मुख्य सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने बताया कि, नई पर्यटन नीति के तहत अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे प्रतिष्ठित धार्मिक केंद्रों के साथ-साथ उभरते पर्यटन स्थलों का भी समग्र विकास किया जा रहा है।
कनेक्टिविटी, विश्वस्तरीय ठहराव सुविधाएं, स्वच्छता और सुरक्षित पर्यटन माहौल को प्राथमिकता देते हुए ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे 2047 तक उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाले पर्यटन राज्यों में शामिल हो सके।
वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी पर हुई बैठक में मा0 मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात, महानिदेशक पर्यटन डॉ० वेदपति मिश्रा, विशेष सचिव ईशा प्रिया, यूपीएसटीडीसी के एमडी आशीष कुमार, निदेशक इको टूरिज्म पुष्प कुमार के०, सलाहकार जयप्रकाश सिंह सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।





