देवघर। महाशिवरात्रि, देवघर, मनीष, फाइल बाबाधाम पंचशूल पूजा, देवघर देवघर में पंचशूल उतारने की परंपरा शुरू बाबा बैद्यनाथ मंदिर के 22 शिखरों से उतरेगा पंचशूल एंकर बाबाधाम में आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं में जीवंत दिखाई देती है। महाशिवरात्रि से पहले बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर के 22 मंदिरों के शिखरों से पंचशूल उतारने की अनोखी परंपरा एक बार फिर शुरू हो चुकी है।
खास विधि-विधान, धार्मिक मान्यता और गहरी आस्था से जुड़ी इस प्रक्रिया को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।वीओ 1 15 फरवरी को महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। फागुन मास के कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि से बाबा मंदिर प्रांगण स्थित 22 मंदिरों के शिखरों से पंचशूल उतारने की प्रक्रिया आरंभ हुई।
14 फरवरी को विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के दीवान द्वारा विशेष मंत्र लिखे कपड़े में लपेटकर पंचशूल को पुनः शिखरों पर स्थापित किया जाएगा। बाइट – भक्तिनाथ फलाहारी, पुरोहित, बाबा बैद्यनाथ धाम वीओ 2 पुरोहित प्रमोद शृंगारी बताते हैं कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और महाशिवरात्रि से आठ दिन पूर्व विधिवत पंचशूल उतारे जाते हैं।
मान्यता है कि पंचशूल पांच तत्व — क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर — से निर्मित हैं। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार इन्हें महान शिव भक्त रावण ने मंदिर की सुरक्षा के लिए स्थापित किया था। बाइट- प्रमोद शृंगारी, पुरोहित, बाबा बैद्यनाथ धाम अंतिम वीओ इन्हीं अनोखी और प्राचीन परंपराओं के कारण देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम विश्व के अन्य शिवालयों से अलग पहचान रखता है। आस्था, परंपरा और विश्वास का यह संगम महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एक बार फिर जीवंत हो उठेगा






