विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल से उच्च शिक्षा को मिलेगी नई दिशा

दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर भारत में आजादी के बाद से शिक्षा की औपनिवेशिक मानसिकता वाले ढ़ांचे में लगातार सुधार किये जाते रहें हैं, जिसमें नई शिक्षा नीति-2020 एक अभिनव प्रयास रहा है और अब उच्च शिक्षा में सुधारों की यह यात्रा विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 के साथ और आगे बढ़ाई जा रही है। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 को संसद में पेश किया है। बिल पर अभी संसद में गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है।

प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए), एक प्रमुख संस्थान के रूप में, एकीकृत, टेक्नोलॉजी-संचालित ढांचे के तहत मानक-निर्धारण, एक्रीडिएशन और रेगुलेशन को मिलाकर इस क्षेत्र को सुव्यवस्थित करने की एक पहल है। उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए, यह प्रक्रियात्मक अनावश्यकताओं को कम करने और शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।

निश्चित रूप से यह बिल भारत की उच्च शिक्षा सुधार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। ऐसा इसलिये भी कह सकते हैं कि देश के करीब 37 करोड़ युवाओं के ज्ञान संवर्धन में अब जिस गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की जरूरत है उसके लिये एक मजबूत शैक्षिक ढ़ांचा बनाना होगा। यह बिल जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनायेगा जिससे जिससे पूर्ण पारदर्शी और टेक्नोलॉजी आधारित ढ़ांचा तैयार होगा।

पिछले कुछ दशकों में भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है, जिसमें एक हजार से अधिक विश्वविद्यालय और हजारों उच्च शिक्षण संस्थान चार करोड़ से अधिक छात्रों का भविष्य संवारने में अहम योगदान दे रहे हैं। वैसे तो इस शैक्षिक विस्तार से पहुंच बढ़ी है, लेकिन फिर भी कई वैधानिक निकायों के अस्तित्व के कारण नियामक विखंडन और अतिव्यापी अनुपालन आवश्यकताओं की समस्या भी पैदा हुई है।

यह बिल यूनियन लिस्ट की एंट्री 66 के तहत संवैधानिक जनादेश पर आधारित है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 के विज़न के साथ मिलकर, उच्च शिक्षा के समन्वित, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर एक मुकाम रखने वाले रेगुलेशन के लिए एक मजबूत नींव रखता है। प्रस्तावित ढांचा समय के अनुसार और प्रगतिशील दोनों है, जिसमें हायर एजुकेशन के इकोसिस्टम में अकादमिक उत्कृष्टता, संस्थागत स्वायत्तता और राष्ट्रीय क्षमता निर्माण को काफी मजबूत करने की क्षमता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा परिकल्पित “लाइट बट टाइट ” रेगुलेटरी ढांचे पर बिल का जोर, व्यापक उच्च शिक्षा क्षेत्र की शैक्षिक एकरूपता, पारदर्शिता और नवाचार को दृढता के साथ लागू किये जाने पर है। यह फोकस को निर्देशात्मक नियंत्रण से हटाकर सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण द्वारा समर्थित परिणाम-आधारित निगरानी पर स्थानांतरित करके, प्रस्तावित ढांचा जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा देता है। फेसलेस, टेक्नोलॉजी युक्त सिंगल-विंडो सिस्टम की ओर यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अच्छा प्रदर्शन करने वाले संस्थानों के लिए दक्षता, निष्पक्षता और प्रशासनिक बोझ में कमी आयेगी।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह बिल राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की मौजूदा स्वायत्तता की स्पष्ट रूप से रक्षा करता है। साथ ही विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए समग्र नियामक माहौल को भी मज़बूत करता है। अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र रूप से काम करने के लिये प्रस्तावित स्टैंडर्ड्स काउंसिल, रेगुलेटरी काउंसिल और एक्रेडिटेशन काउंसिल एक मज़बूत नियंत्रण और संतुलन बनाते हैं जो शैक्षणिक मानकों को बनाये रखने के साथ संस्थागत विभिन्नता और नवाचार को भी बढ़ावा देता है।

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल उच्च शिक्षण संस्थानों के अंतर-विषयक शिक्षा, अनुसंधान-आधारित शिक्षण और उद्योग-संबंधी कौशल विकास को बढ़ावा देने के विज़न को भी पूरा करता है। दुनिया की सर्वोत्तम प्रथाओं, लचीले शैक्षणिक ढांचों और निरंतर रीस्किलिंग पर बिल का फोकस सीधे तौर पर उच्च शिक्षा क्षेत्र में उन प्रयासों का समर्थन करता है जो भविष्य के लिए तैयार ऐसे ग्रेजुएट तैयार करते हैं जो जटिल आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों। पूर्ण पारदर्शिता, छात्र फीडबैक-आधारित मूल्यांकन, और एक मज़बूत शिकायत निवारण तंत्र एक शिक्षार्थी-केंद्रित इकोसिस्टम बनाने में और योगदान देते हैं।

इसी तरह, उच्च शिक्षा में युवा सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर बिल का ज़ोर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। संस्थानों को ज़िम्मेदारी से इनोवेशन करने और शैक्षणिक पेशकशों को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने में सक्षम बनाकर, यह प्रस्तावित ढांचा भारत के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के लिए आवश्यक प्रतिभाओं को और सुदृढ करता है। यह बिल उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के व्यापक विज़न में अपने योगदान को गहरा करने के लिए एक सक्षम माहौल प्रदान करता है।

आखिर में कहें तो, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 एक दूरदर्शी सुधार है जो स्वायत्तता और जवाबदेही, इनोवेशन और इंटेग्रिटी, विकास और गुणवत्ता के बीच संतुलन बनाता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस कानून को एक सुसंगत, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार उच्च शिक्षा प्रणाली बनाने की दिशा में एक रचनात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उच्च शिक्षण संस्थान इस विकसित हो रहे ढांचे के भीतर काम करने, उत्कृष्टता बनाए रखने, प्रतिभा का पोषण करने और एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र की ओर भारत की यात्रा में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

-प्रो. मनोज कुमार तिवारी

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

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