पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपना लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में साफ संदेश दिया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, सीईसी ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए कई गंभीर चूकें उजागर कीं। सवाल उठाया गया कि जब 2002 की मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर 14 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक अपलोड करना अनिवार्य था, तो फिर अखबार की कटिंग या खाली पन्ने पोर्टल पर कैसे अपलोड हो गए? किसने अपलोड किए? और क्या जिलाधिकारियों ने उनकी जांच की? सीईसी का निर्देश है कि सोमवार शाम पांच बजे तक सभी जिलाधिकारी दस्तावेजों की जांच कर सुनिश्चित करें कि केवल स्वीकृत दस्तावेज ही पोर्टल पर हों। इसके बाद यदि कोई भी अप्रासंगिक दस्तावेज पाया गया, तो जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
सीईसी ने डीएम, ईआरओ और एईआरओ को चेतावनी देते हुए कहा कि सिस्टम में सब कुछ रिकॉर्ड है और भविष्य में किसी भी गड़बड़ी के लिए सीधे जवाबदेही तय की जाएगी। इस दौरान कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना के अधिकारियों को फटकार भी लगाई गई है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर बीजेपी ने ममता सरकार पर हमला बोला है। बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल और शंकर घोष ने बंगाल के अधिकारियों पर सीएम ममता बनर्जी के निर्देशों पर काम करने का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।







