नई दिल्ली: विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 224 के तहत की जाती है। इनमें किसी भी जाति या वर्ग के व्यक्तियों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है।
प्रक्रिया ज्ञापन के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने का दायित्व भारत के मुख्य न्यायाधीश का है, जबकि उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजने का दायित्व संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का है।
सरकार न्यायपालिका में सामाजिक विविधता को बढ़ावा देने को प्रतिबद्ध है और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध करती रही है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रस्ताव भेजते समय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिला उम्मीदवारों पर उचित रूप से विचार किया जाए जिससे उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता सुनिश्चित हो ।
मेघवाल ने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक उच्च न्यायालयों में 170 महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई है, जिनमें पिछले पांच वर्षों में 96 महिला न्यायाधीश शामिल हैं। इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय में 6 महिला न्यायाधीशों की नियुक्त हुई है। सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित व्यक्तियों को ही सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाता है।




