नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के तहत युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण: अनुपम कश्यप

शिमला(हिमाचल प्रदेश): नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (एनएपीएस की जिला स्तरीय बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में की गई। बैठक में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है जिसके बारे में पीपीटी के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी गई। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के योग्य बनाना है।

यह योजना अप्रेंटिसशिप एक्ट, 1961 के अंतर्गत संचालित की जाती है और इसे कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा लागू किया गया है।एनएपीएस का मूल विचार है ‘अर्न व्हाइल यू लर्न’, यानी काम सीखते हुए कमाई करना। इस योजना के तहत छात्र और युवा विभिन्न उद्योगों, कारखानों, कंपनियों और संस्थानों में अप्रेंटिस के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।

इससे उन्हें वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव मिलता है, जो केवल कक्षा में पढ़ाई से संभव नहीं होता। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें एक सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र भी मिलता है, जिससे उनकी रोजगार पाने की संभावना बढ़ जाती है। उपायुक्त ने कहा कि सरकारी और निजी कार्यालयों में, जहां पर कर्मचारियों की संख्या 30 से अधिक है, नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम को लागू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिला के बड़े होटलों, बैंकों आदि में युवाओं को रखा जाएगा। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और साथ ही वह निपुण भी होंगे। उन्होंने कहा कि एनएपीएस के अंतर्गत सरकार नियोक्ताओं (एम्प्लॉयर्स) को भी प्रोत्साहन देती है। सरकार द्वारा अप्रेंटिस को दिए जाने वाले स्टिपेन्ड का 25 प्रतिशत या अधिकतम 1500 रुपए प्रति माह प्रति अप्रेंटिस तक वहन किया जाता है।

इसके अलावा, बेसिक ट्रेनिंग से जुड़ी कुछ लागत भी सरकार द्वारा वहन की जाती है। इसमें छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी अप्रेंटिस रखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है और उन्हें कम लागत में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम युवाओं को कौशल, अनुभव और रोजगार तीनों से जोड़ने वाली एक प्रभावी पहल है।

यह न केवल युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाती है, बल्कि देश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। अप्रेंटिस बनने के लिए न्यूनतम आयु 14 वर्ष (कुछ खतरनाक उद्योगों में 18 वर्ष) निर्धारित है और शैक्षणिक योग्यता ट्रेड के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, जैसे 10वीं, 12वीं, आईटीआई या डिप्लोमा। प्रशिक्षण की अवधि आमतौर पर 6 महीने से 36 महीने तक होती है, जो कोर्स और ट्रेड पर निर्भर करती है।

अप्रेंटिसशिप के लिए सभी सरकारी विभागों और निजी कार्यालयों को https://www.apprenticeshipindia.gov.in/ बेवसाईट पर पंजीकरण करवाना होगा। इसके साथ ही युवाओं को भी बेवसाइट पर पंजीकरण करवाना होगा। इसी के माध्यम से सारी प्रक्रियाएं पूरी की जाएगी।

Editor

I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

Related Posts

रिकांगपिओ में तीन दिवसीय जनगणना–2027 प्रशिक्षण शिविर का समापन

किन्नौर, ‌हिमाचल प्रदेश उपायुक्त किन्नौर ‌डॉ. अमित कुमार शर्मा ने आज ‌तीन दिवसीय जनगणना-2027 के प्रथम चरण ‌के ‌प्रशिक्षण शिविर के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस…

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को सूची में शामिल कराने हुई कार्यशाला

भोपाल वन्य जीव संस्थान देहरादून द्वारा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंज़र्वेशन एरिया (जीएचएनपीसीए), साईरोपा कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में 2 दिवसीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन 15–16 मार्च को किया गया। कार्यशाला…