Rulet masalarında minimum bahis miktarı genellikle düşüktür, bahsegel giriş her bütçeye uygun seçenekler sağlar.

Yeni üyelere özel hazırlanan bahsegel kampanyaları büyük ilgi çekiyor.

Online oyun dünyasında güvenilirliğiyle öne çıkan bahsegel kalitesini kanıtlamıştır.

Spor tutkunları canlı karşılaşmalara pinco üzerinden yatırım yapıyor.

Bahis severlerin ihtiyaçlarına göre sürekli yenilenen bettilt kullanıcı dostudur.

संगोष्ठी में हुआ शक्ति स्वरूपा सीता माता पर केन्द्रित विमर्श 

नई दिल्ली।

जनक सुता , जगत की जननी जानकी माता पर केन्द्रित विचार विमर्श का आयोजन 25 सितम्बर 2025 को धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं की उपस्थिति में किया गया।

“स्त्री प्रणेता जनक नंदनी सीता ” विषय पर यह संगोष्ठी जानकी रिसर्च काउंसिल द्वारा नई दिल्ली के मालवीय भवन में हुई।

संगोष्ठी की अध्यक्षता काशी के जाने माने संत , गंगा बचाओ आंदोलन के तहत नमामी गंगे की लड़ाई लड़ने वाले , संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने की ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर रहे और भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री एस .पी. सिंह बघेल ने विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मशहूर कथावाचक साध्वी समाहित देवी और विश्व मांगल्या सभा की अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री पूजा देशमुख रही ।

 “स्त्री प्रणेता जनक नंदनी सीता “ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य आज के युग में त्रेता युग सीता की समाज और परिवार कितनी जरूरत है ? इसके बारे में बताना था।

  आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की स्वरूप माता जानकी के हर पहलू पर समर्पित इस संगोष्ठी “परिवार से समाज और फिर राष्ट्र निर्माण में सीता स्वरूपा स्त्री भूमिका की कितनी जरूरत है ? इस बारे में चर्चा की गई।

संगोष्ठी का शुभारंभ दोपहर 4 बजे दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ सिया-वर रामचंद्र की जय के उदघोष से हुआ ।

इस अवसर पर शिवानी तिवारी ने देव-वंदना की संगीतमय प्रस्तुति दी ।

कार्यक्रम में संत समिति के धर्म विभाग के अखिल भारतीय अध्यक्ष आचार्य शुभेष श्रमण ने विषय प्रवर्तन किया । विश्व मांगल्य सभा की सह संगठन मंत्री पूजा देशमुख ने अपने उद्बोधन में सीता के व्यक्तित्व और उपलब्धियों की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया । 

वहीं मुख्य वक्ता साध्वी समाहिता ने स्त्री चेतना में वीरांगना रूपी निर्भीक ,संस्कारित समर , परिवार और राष्ट्र की संग्राहक सीता को समाहित करने की बात कही ।  

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने इस भागती दौड़ती आधुनिक युग में संघ शताब्दी वर्ष में आरएसएस के पंच परिवर्तन केंद्रित विषय में से एक परिवार प्रबोधन पर केंद्रित अपने उद्बोधन में परिवार के आदर्शों में माता सीता के मूल्यों को समाहित करने की बात कही । उन्होंने भारत के बच्चों में भारतीयता को बचाए रखने के लिए रोजमर्रा की ज़िंदगी में क्षेत्रीय भाषाओं खास कर हिन्दी भाषा को बचाए रखने पर बल दिया ।

 उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति संस्कारों की शिक्षा देना अत्यंत अवश्य हो गया है । परिवार में रामायण और वैदिक ग्रंथो का अध्ययन करवाने से बच्चों को संस्कारित किया जा सकता है । आगामी पीढ़ी को संस्कारित करने के लिए हम सबको प्रयास करना चाहिए । उन्होंने कहा कि सीता माता से संयमित संवाद और अनुशासन सीखने की जरूरत है । 

विशेष अतिथि केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल सीता माता से शक्ति तक और स्त्री सम्मान और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम स्वागत योग्य है । 

 समाज में भारतीयता बचाए रखने और युवा वर्ग को जोड़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए । 

माता जनक नंदनी जानकी के जीवन दर्शन पर आयोजित इस संगोष्ठी में जहाँ माँ जानकी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई वहीं सभी वक्ताओं ने भारतीय परिवार , समाज और संस्कृति में पाश्चात्य सभ्यता का युवाओं पर बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और इसके दूरगामी परिणाम को भारत और भारत की संस्कृति के लिए घातक माना । 

राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कार्यक्रम में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वैदिक काल से ही भारत की स्त्रियां वैचारिक रूप से कितनी स्वतंत्र थीं इसको हम माता सीता के चरित्र में साफ़ देश सकते हैं । हमें ऐसा लगता कि रामायण राम केंद्रित है लेकिन वास्तव रामायण की पूरी गाथा सीता माता पर केंद्रित है । इसमें राम अगर शरीर है तो सीता आत्मा और अगर आत्मा निकल जाए तो शरीर का कोई मूल्य नहीं रह जाता है ।

  अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की स्त्रियां वैदिक काल से ही हर निर्णय में शामिल रही हैं ।

 इस बदलते परिवेश में हमें आज की अपनी सीताओं को बचाना अगर अभी हम सचेत नहीं होंगे तो आने वाले समय कालनेमि ना जाने कितने रावण आ खेड़े होंगे । 

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने एक प्रसंग के माध्यम से बताया बहरुपीयों से सावधान रहना चाहिए। 

सभी वक्ताओं ने माता जानकी के जीवन दर्शन से आज के सन्दर्भ में सीखने की आवश्यकता पर बल दिया । वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक, राजनीतिक , धार्मिक सभी पक्षों में सर्तकता , जागरूकता बहुत आवश्यक है।  

कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत समिति के अलखनाथ बाल योगी महाराज , नरेंद्र ठाकुर , सह प्रचार प्रमुख राष्ट्रीय सयंव सेवक संघ , केंद्रीय राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ,साध्वी समाहिता देवी , वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप तिवारी, संजय गौतम, योगेश अग्रवाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम की संयोजिका अनीता चौधरी ने मंच संचालन किया ।

 

  • Editor

    I am a journalist having over 25 years of experience in journalism. Having worked for several national dailies and as correspondent in All India Radio, I am currently working as a freelancer.

    Related Posts

    Casino uden Rofus i Danmark – din guide til sikkerhed, bonusser og hurtige udbetalinger

    Hvad betyder “casino uden Rofus”? Baggrund om Rofus-systemet Sådan vælger du et sikkert casino uden Rofus Licens og sikkerhed Betalingsmetoder og udbetalingshastighed Registrering og verifikation i et casino uden Rofus…

    Casino uden Rofus – Sådan gennemfører du registreringen enkelt og sikkert

    Registrering og verifikation – Sådan kommer du i gang Bonusser og velkomsttilbud – Hvad kan du forvente? Betalingsmetoder og udbetaling – Hvor hurtigt kan du få dine penge? Spiludvalg: Live…