मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण, बिहार) :पूर्वी चंपारण के मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के सेल फॉर पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज (PWD Cell) के तत्वावधान में “भारत में दिव्यांगों का भविष्य” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में हुआ।
यह सम्मेलन समावेशी शिक्षा, गरिमा-केंद्रित विकास और दिव्यांगजनों के अधिकारों व सहभागिता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक और सामाजिक पहल के रूप में सामने आया। सम्मेलन में देश के लगभग 12 से 13 राज्यों के वक्ता शामिल हुए।
सम्मेलन का उद्देश्य था कि सभी प्रकार के वंचित और सीमांत समूहों को एक साझा मंच पर लाकर संवाद, सहयोग और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. दीपक ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम दिव्यांगजनों के भविष्य को देखने और समझने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि साहित्य और सिनेमा में दिव्यांग व्यक्तियों को अक्सर भिखारी या गरीब के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि आज के सिनेमा में उन्हें हीरो की तरह भी दिखाया जाने लगा है। आने वाले 50 वर्षों में दिव्यांगजनों के भविष्य को बेहतर बनाने और विजन 2047 के तहत सरकार की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उन्हें कैसे पहुंचेगा, इस पर भी चर्चा की गई।
प्रोफेसर डॉ. दीपक ने यह भी बताया कि सम्मेलन में नेशनल और इंटरनेशनल सभी स्पीकर्स शामिल हुए, और यह कार्यक्रम दिव्यांगजनों के समग्र विकास व उनके समाज में समान और गरिमापूर्ण स्थान को सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।







