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निर्भीक, निर्मोही, निराले: श्री चन्द्रहास गुरुजी

July 11, 2026 · Editor

” तन समर्पित – मन समर्पित और यह जीवन समर्पित,
चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं “
इस विचारधारा को जीते हुए विपरीत परिस्थितियों के बीच अपने संकल्प के लिए अडिग रहना आसान नहीं है।


बहुत बिरले और दृढ़ इच्छाशक्ति के व्यक्तित्व ही ऐसा कर पाते हैं। इन दिनों जबकि छोटे-छोटे स्वार्थ के लिए लोग विचारधारा, वफादारी को बदल रहे हैं, ऐसे में जो व्यक्ति विचारधारा को अपने आचरण से जीते हैं, वो अपने कर्म से समाज में आदर्श, अनुकरणीय उदाहरण बन जाते हैं। पत्रकार, साहित्यकार चंद्रहास शुक्ल ऐसे ही व्यक्ति हैं जो अपने काम से धर्म समाज के बीच आदर्श अनुकरणीय उदाहरण बन गए हैं।


चंद्रहास शुक्ल ऐसा नाम है जो धर्म, समाज, पत्रकारिता, प्रशासन से लेकर राजनीति के गलियारों तक में प्रतिष्ठित पदों पर आसीन अपने शुभचिंतकों के बीच अलग-अलग नाम से लोकप्रिय हैं।

इस वर्ष 13 जुलाई 2026 को चंद्रहास शुक्ल का 75वां जन्मदिन उनके शुभचिंतक उत्साह के साथ समारोह पूर्वक मना रहे हैं।
राष्ट्रवादी विचारधारा को अपने आचरण में समाहित कर लेने वाले चंद्रहास शुक्ल की गिनती उन बिरले – अलबेले – निराले लोगों में होती है जो समाज और सरकार से लेने की बजाय हमेशा कुछ न कुछ देने का भाव रखते हैं। वे इसका न प्रचार प्रसार चाहते हैं और न ही इसका श्रेय लेकर तारीफ बटोरना चाहते हैं। चंद्रहास शुक्ल यथासंभव – यथाशक्ति किसी इनाम – सम्मान की उम्मीद के बिना खामोशी के साथ समाज की विसंगतियों को नष्ट करने के लिए प्रयास करते हैं।

धर्म – समाज – संस्कृति – संस्कार के लिए समर्पित भाव से सेवा का कार्य करते हुए बिना रुके – बिना थके वे चुपचाप कब किसकी और किस तरह मदद कर देते हैं, इसका पता भी नहीं चलता।


दैनिक जागरण, देशबंधु, स्वदेश, एक्सप्रेस न्यूज़, चरैवेति सहित अनेक समाचार पत्रों – पत्रिकाओं में लगभग 50 साल से अधिक की पत्रकारिता करते हुए धुन के पक्के, धर्म धुरंधर चंद्रहास शुक्ल ने खूब लिखा। जो लिखा उसने गंभीर समस्याओं की तरफ सरकार और समाज का ध्यान खींचा।

निडरता के साथ उनकी कलम ने तत्कालीन मुख्य सचिव के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया।


जबरन धर्म परिवर्तन के विरुद्ध उन्होंने ” कितनी शर्मिला आयशा बनेंगी ?” नामक एक पुस्तक लिखी जो खूब चर्चित हुई। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उनके तीखे तेवर और उनके द्वारा लिखी गई क्रान्तिकारी कविताओं को लोग आज भी नहीं भूले हैं।


श्री शुक्ल ने दिवंगत पत्रकारों की स्मृति को अमर करने के लिए पुण्य स्मरण नामक पुस्तक का प्रकाशन प्रारंभ किया जो जिसमें दिवंगत पत्रकारों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। इस पुस्तक को बिना विज्ञापन लिए, बिना किसी से चन्दा लिए, किसी भी व्यक्ति से आर्थिक सहयोग लिए बिना प्रकाशित किया गया। श्री चंद्रहास शुक्ल ने इसका मूल्य केवल एक रुपए रखा । इस पुस्तक को साहित्य, पत्रकारिता के क्षेत्र में सराहना मिली।

श्री शुक्ल ने विभिन्न धार्मिक सामाजिक विषयों से लेकर बच्चों के लिए भी पुस्तकें लिखी है। उनके द्वारा लिखी गई सभी पुस्तकों का मूल्य एक रुपए ही है। वे अब तक लगभग एक दर्जन पुस्तकें लिख चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में अनेक गृहिणियों, युवकों, युवतियों ने अपने काव्य संकलन का सफलतापूर्वक प्रकाशन किया।


एक आटो रिक्शा चलाने वाला व्यक्ति जो गाता गुनगुनाता है वह अच्छी कविता हो सकती है, इस बात को चन्द्रहास जी ने समझा जिसका परिणाम यह रहा कि आटो रिक्शा वाले की कविताएं भी पुस्तक के रूप में सबके सामने आ गई।


वे साहित्य की अभिरुचि के पारखी हैं और ऐसे लोगों के लेखन में यथासंभव सहयोग करते हैं। अपनी परेशानी कभी किसी को न बताना और दूसरों की परेशानी दूर करने में बिना पुकारे मदद करना चंद्रहास शुक्ल का विशेष गुण है।


वे सहज, सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं जो कि लो प्रोफाइल रहते हुए सबमें घुल मिल जाते हैं। उनकी सहजता – सरलता का ग़लत फायदा उठाने वाले लोगों को परेशान होते देखा गया है।


हम सभी ऐसे समय में जी रहे हैं जबकि हर आदमी कुछ मदद करने से पहले यह सोचता है कि बदले में मुझे क्या मिलेगा ?
यह सवाल चंद्रहास शुक्ल के दृष्टिकोण में कभी नहीं रहा।
वे जाने – अनजाने , सब लोगों को उपयुक्त सहयोग बिना किसी शुभ – लाभ की अपेक्षा से करते हैं।

संवेदनशीलता, सहानुभूति, सकारात्मक सोच के साथ सबको सहयोग करते हुए हमारे गुरु चंद्रहास शुक्ल स्वस्थ, सुखी, सानंद रहते हुए शतायु हों, ऐसी प्रार्थना हम सब ईश्वर से करते हैं।

– अमिताभ पाण्डेय

( लेखक ” आत्मीय सभा ” के प्रमुख हैं , संपर्क : 9424466269 )

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