नई दिल्ली
 भारत इस बार आजादी की 75वीं सालगिरह मना रहा है। इस मौके पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राजधानी दिल्ली से पूरे देश को संबोधित किया। राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मु का देश के नाम यह पहला संबोधन है। उन्होंने कहा कि छिहत्तरवें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर मैं देश-विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को हार्दिक बधाई देती हूं।

आजादी के 75वें वर्ष में भारत ने 75 वेटलैंड्स के लक्ष्य को किया हासिल
पर्यावरण मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 11 और आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) को रामसर सूची में शामिल किया गया। इसी के साथ आजादी के 75वें वर्ष में देश में अंतरराष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड्स की संख्या 75 हो गई है।  

सूची में शामिल 11 स्थलों में से तमिलनाडु में 4, ओडिशा में 3, जम्मू-कश्मीर में 2 और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में एक-एक हैं। 1982 से 2013 तक 26 साइटों को रामसर सूची में रखा गया, जबकि 2014 के बाद से 49 साइटों को यह उपलब्धि हासिल हुई। इस साल सबसे ज्यादा 28 स्थल वेटलैंड्स घोषित किए गए।

ये हैं नए वेटलैंड्स
तमिलनाडु में चित्रंगुडी पक्षी अभयारण्य, सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स, वडुवुर पक्षी अभयारण्य और कांजीरंकुलम पक्षी अभयारण्य, ओडिशा में ताम्पारा झील, हीराकुंड जलाशय और अंसुपा झील, जम्मू-कश्मीर में हाइगम वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व व शालबुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व व महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में क्रमश: ठाणे क्रीक व यशवंत सागर को इस सूची में शामिल किया गया है। बता दें कि अभी तमिलनाडु में रामसर स्थलों की अधिकतम संख्या 14 है।

राष्ट्रपति के संबोधन की अहम बातें

    14 अगस्त के दिन को विभाजन-विभीषिका स्मृति-दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस स्मृति दिवस को मनाने का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, मानव सशक्तीकरण और एकता को बढ़ावा देना है।

    15 अगस्त 1947 के दिन हमने औपनिवेशिक शासन की बेड़ियों को काट दिया था। उस शुभ-दिवस की वर्षगांठ मनाते हुए हम लोग सभी स्वाधीनता सेनानियों को सादर नमन करते हैं। उन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया ताकि हम सब एक स्वाधीन भारत में सांस ले सकें।

    अधिकांश लोकतान्त्रिक देशों में वोट देने का अधिकार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। लेकिन हमारे गणतंत्र की शुरुआत से ही भारत ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को अपनाया।

    ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मार्च 2021 में दांडी यात्रा की स्मृति को फिर से जीवंत रूप देकर शुरू किया गया। उस युगांतरकारी आंदोलन ने हमारे संघर्ष को विश्व-पटल पर स्थापित किया। उसे सम्मान देकर हमारे इस महोत्सव की शुरुआत की गई। यह महोत्सव भारत की जनता को समर्पित है।


    पिछले वर्ष से हर 15 नवंबर को ‘जन-जातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का सरकार का निर्णय स्वागत-योग्य है। हमारे जन-जातीय महानायक केवल स्थानीय या क्षेत्रीय प्रतीक नहीं हैं बल्कि वे पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

    हमने देश में ही निर्मित वैक्सीन के साथ मानव इतिहास का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया। पिछले महीने हमने दो सौ करोड़ वैक्सीन कवरेज का आंकड़ा पार कर लिया है। इस महामारी का सामना करने में हमारी उपलब्धियां विश्व के अनेक विकसित देशों से अधिक रही हैं।


    हमारा संकल्प है कि वर्ष 2047 तक हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के सपनों को पूरी तरह साकार कर लेंगे।

    जब दुनिया कोरोना महामारी के गंभीर संकट के आर्थिक परिणामों से जूझ रही थी तब भारत ने स्वयं को संभाला और अब पुनः तीव्र गति से आगे बढ़ने लगा है। इस समय भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही प्रमुख अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक है।

    भारत में आज संवेदनशीलता व करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है। इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य हमारे वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के कल्याण हेतु कार्य करना है।

    देश के प्रत्येक नागरिक से मेरा अनुरोध है कि वे अपने मूल कर्तव्यों के बारे में जानें, उनका पालन करें, जिससे हमारा राष्ट्र नई ऊंचाइयों को छू सके।

    आज देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और अर्थ-व्यवस्था तथा इनके साथ जुड़े अन्य क्षेत्रों में जो अच्छे बदलाव दिखाई दे रहे हैं उनके मूल में सुशासन पर विशेष बल दिए जाने की प्रमुख भूमिका है।

    महिलाएं अनेक रूढ़ियों और बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ रही हैं। सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं में उनकी बढ़ती भागीदारी निर्णायक साबित होगी। आज हमारी पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या चौदह लाख से कहीं अधिक है।

    हमारे देश की बहुत सी उम्मीदें हमारी बेटियों पर टिकी हुई हैं। समुचित अवसर मिलने पर वे शानदार सफलता हासिल कर सकती हैं। हमारी बेटियां fighter-pilot से लेकर space scientist होने तक हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं।

    आज जब हमारे पर्यावरण के सम्मुख नई-नई चुनौतियां आ रही हैं तब हमें भारत की सुंदरता से जुड़ी हर चीज का दृढ़तापूर्वक संरक्षण करना चाहिए। जल, मिट्टी और जैविक विविधता का संरक्षण हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है।

Source : Agency