नई दिल्ली

एशिया की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल सहित राजधानी की तीनों जेलों में इन दिनों मोबाइल फोन की जैसे बारिश हो रही है। सूत्रों के मुताबिक तीनों जेलों में एक माह के भीतर करीब 140 से अधिक मोबाइल फोन सर्च टीम के अधिकारियों द्वारा जब्त किए जा चुके हैं। इनमें से बड़ी संख्या में मिनी मोबाइल फोन हैं जो खचड़ा ब्रांड के बताए जा रहे हैं। जेल के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि जेल में फोन थ्रो करके भेजे जा रहे हैं और जेल के निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से फोन कैदियों के हाथों में पहुंच रहे हैं। ऐसा नहीं है कि तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल में मोबाइल फोन पहली बार मिल रहे हैं। लेकिन, यह पहला मौका है जब तीनों जेलों में इतनी बड़ी तादाद में मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।

कभी-कभी तो ऐसा भी हुआ है कि जेलों में एक साथ आठ से दस फोन ऊपर से आकर जेल में गिरे हैं। सूत्रों का कहना है कि मोबाइल फोन की यह बारिश रात के समय में अधिक होती है। फोनों को जेल से सटी सड़क की तरफ से जुराब या फोम के पैकेट बना कर फेंका जा रहा है। बताया गया कि जेलों के भीतर मोबाइल फोन पहुंचाने के लिए शातिर अपराधियों ने अपने गिरोह से जुड़े कुछ युवकों को इसी काम में लगा रखा है और एक मोबाइल फोन अंदर तक पहुंचाने के लिए उसे 700 से एक हजार रुपये के बीच दिए जाते हैं।

जेल सूत्रों का कहना है कि इन दिनों जेल में खचड़ा ब्रांड के मोबाइल फोन आने की वजह यह है कि एक तो वह छोटे हैं और दूसरा उनकी कीमत करीब एक हजार से दो हजार रुपये के बीच है। तीसरा वह मोबाइल बाजार में आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। इस ब्रांड के मोबाइल फोन की सबसे बड़ी खासियत है कि वह जैमर लगे होने के बाद भी काम करते हैं। यानी कैदियों को जिससे बात करनी होती वह आसानी से हो जाती है।

क्या कहते हैं तिहाड़ के डीजी
तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल का कहना है कि मंडोली जेल नंबर 13 से एक साथ 19 मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इनमें से 13 मोबाइल छोटे थे। उनका कहना है कि एक माह में कितने मोबाइल फोन तीनों जेलों से जब्त किए गए इस आंकड़े को वह शेयर नहीं कर सकते। लेकिन, अधिकांश मोबाइल फोन थ्रो के जरिये आ रहे हैं। जेल के स्टाफ की मिलीभगत की बात से भी वह इंकार नहीं करते हैं। उनका कहना है कि मोबाइल जब्त होने पर पुलिस में मामला दर्ज नहीं होता है।

Source : Agency